हरियाणा में धान उत्पादन पर मानसून का संकट: 2026 में गिरावट की आशंका
हरियाणा में धान उत्पादन पर संकट
हरियाणा में धान उत्पादन 2026 : देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हरियाणा में 2026 का कमजोर मानसून खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान के लिए गंभीर संकट का कारण बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से सितंबर के अंत तक हरियाणा में औसत 429.3 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 314.8 मिमी बारिश हुई। इस 27 प्रतिशत की कमी ने करनाल, कुरुक्षेत्र और कैथल जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिलों से लेकर सिरसा और रोहतक तक किसानों की लागत में वृद्धि की है और उपज पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
नहरी तंत्र से फसल की रक्षा, लेकिन लागत में वृद्धि
नहरी तंत्र से बची फसल, पर बढ़ी लागत
कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में 80 से 85 प्रतिशत धान का रकबा सिंचित है। किसानों ने नहरी तंत्र और बिजली-डीजल ट्यूबवेलों के माध्यम से फसल को सूखने से बचा लिया, लेकिन इससे भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आई है। अतिरिक्त सिंचाई ने किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। मंडियों में फसल की शुरुआती आवक भी पिछले वर्षों की तुलना में कम है।
सूखे का प्रभाव
इन जिलों पर पड़ी सूखे की सबसे ज्यादा मार
हरियाणा के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में मानसूनी असंतुलन गंभीर हो गया है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सिरसा में सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश हुई, जबकि कैथल में 50 प्रतिशत, अंबाला में 51 प्रतिशत और रोहतक में 48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इससे इन क्षेत्रों में लंबे समय तक सूखे की स्थिति बनी रही।
धान उत्पादन में गिरावट
धान उत्पादन 97 से घटकर 75 एलएमटी रहने का अनुमान
पिछले पांच वर्षों में लगातार बढ़ते धान उत्पादन में इस वर्ष गिरावट का संकेत मिल रहा है। 2025 में कुल धान उत्पादन 97.05 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 2026 में यह 70 से 75 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। कृषि विभाग नवंबर और दिसंबर में अंतिम फसल कटाई सर्वे रिपोर्ट जारी करेगा, जिसके बाद उत्पादन के अंतिम आंकड़े सामने आएंगे।
उत्तर बनाम दक्षिण हरियाणा
उत्तर बनाम दक्षिण हरियाणा में भारी अंतर
हरियाणा के कुल धान उत्पादन में उत्तर हरियाणा के छह जिलों (करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, यमुनानगर और पानीपत) की हिस्सेदारी 72 से 75 प्रतिशत है। यमुना के मजबूत नहरी नेटवर्क के कारण यहां के किसानों ने विपरीत मौसम में भी सिंचाई का चक्र बनाए रखा। इसके विपरीत, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम के सिरसा, हिसार, भिवानी, महेंद्रगढ़ और रोहतक जैसे जिलों में खारे पानी और बारिश की कमी ने पैदावार को नुकसान पहुंचाया है।
कीटों का बढ़ता हमला
बारिश की कमी से कीटों का बढ़ा हमला
खेतों में प्राकृतिक जलभराव की कमी के कारण फसलों पर कीटों और बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। किसान अमरनाथ बताते हैं कि धान को शुरुआती बढ़वार और दाना पकने के समय भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। इस बार उमस और सूखे के कारण कीटों का हमला बढ़ गया है, जिससे कीटनाशकों पर किसानों का खर्च दोगुना हो गया है।
सरकारी उपाय
फसल विविधीकरण और सरकारी खरीद का रोडमैप
कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और फतेहाबाद जैसे क्षेत्रों में भूजल दोहन को रोकने के लिए राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण नीति को लागू किया है। धान छोड़कर अन्य फसलों को बोने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के अनुसार, 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर 23.98 लाख एकड़ गैर-बासमती का सत्यापन हुआ है, जिसके आधार पर सरकार ने 60 लाख मीट्रिक टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा है। #HaryanaAgriculture #PaddyHarvest2026 #HaryanaFarmers
