हरियाणा में मानसून 2026: बारिश में भारी कमी का सामना
हरियाणा में मानसून की वापसी
हरियाणा में मानसून 2026 की बारिश में कमी: हरियाणा में दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को पंजाब, राजस्थान के कुछ हिस्सों और हरियाणा के आधे हिस्से से मानसूनी हवाएं विदा हो गई हैं। अगले दो से तीन दिनों में यह राज्य के अन्य जिलों से भी पूरी तरह लौट जाएगा। 1 जून से 21 सितंबर 2026 तक पूरे सीजन में केवल 317.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य औसत से 23 प्रतिशत कम है। यह पिछले 7 वर्षों में सबसे सूखा मानसून है, जब 2019 में 42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।
बारिश में गिरावट के कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बारिश में इस कमी का मुख्य कारण प्रशांत महासागर में सक्रिय अलनीनो का प्रभाव है। सामान्यतः 30 सितंबर तक 440 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। 2001 से 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, यह 19वां मौका है जब हरियाणा में मानसूनी बारिश उम्मीद से कम हुई है।
83 दिनों तक सूखा
मानसून की शुरुआत 1 जुलाई को करनाल के रास्ते हुई थी, लेकिन 83 दिनों तक सक्रिय रहने के बावजूद कई दिनों तक सूखे जैसे हालात बने रहे।
जल स्तर की स्थिति
यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज पर इस सीजन में पानी का अधिकतम बहाव केवल 79,620 क्यूसेक तक पहुंचा, जबकि 2019 में यह 8.28 लाख क्यूसेक था। तय समय 30 सितंबर से पहले ही मानसून बिना बरसे लौट गया।
जिलेवार बारिश के आंकड़े
राज्य के अधिकांश जिलों में सूखे के हालात बने रहे। जींद में 58 प्रतिशत, सिरसा में 53 प्रतिशत, कैथल और अंबाला में 49-49 प्रतिशत, रोहतक में 47 प्रतिशत और करनाल में 46 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
किसानों पर प्रभाव
कम बारिश के कारण हरियाणा में फसलों का रकबा 2 प्रतिशत तक घटने की आशंका है। भूमि में नमी की कमी के कारण किसानों को आगामी रबी फसलों की बिजाई से पहले अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ेगी। राज्य का औसत भू-जल स्तर पहले ही 22.80 मीटर पर पहुंच चुका है, जिससे जलविद्युत उत्पादन में कमी और बिजली की मांग में वृद्धि का खतरा है। #HaryanaMonsoon #HaryanaWeather #KisanUpdate
