हिमाचल प्रदेश में भूकंप के तीन झटके, कई घरों को हुआ नुकसान
भूकंप का खौफनाक मंजर
शिमला: हिमाचल प्रदेश में बीती रात भूकंप के तीन शक्तिशाली झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। रातभर धरती के हिलने से लोग भयभीत रहे और सो नहीं पाए। पहला झटका रात 10:04 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.0 मापी गई। इसके बाद रात 11:04 बजे 2.8 और 11:52 बजे 3.0 तीव्रता के दो और झटके महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन कई क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है।
चंबा जिला रहा भूकंप का केंद्र
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इन भूकंपों का केंद्र चंबा जिला था। पहला झटका इतना तीव्र था कि लोग अपने घरों और बहुमंजिला इमारतों से बाहर निकलकर सड़कों पर भागने लगे। भूकंप का प्रभाव हिमाचल प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब में भी महसूस किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भूकंप जमीन के बहुत कम गहराई में आया था, जिससे इसका प्रभाव अधिक विनाशकारी रहा।
धर्मशाला में अस्पताल की छत गिरी
इस भूकंप के कारण कांगड़ा जिले के धर्मशाला में कई घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। पालमपुर के सिविल अस्पताल में भी एक डरावनी घटना हुई, जहां पहले झटके के कारण अस्पताल के पुराने भवन की दूसरी मंजिल की छत गिर गई। गनीमत यह रही कि सभी मरीज सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों में हड़कंप मचा दिया। प्रशासन ने इस भवन को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया था।
शाहपुर में मकान क्षतिग्रस्त
भूकंप ने कई गरीब परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचाया है। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के माहड़ गांव में जिगरी राम का मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। मकान की छत गिर गई है, जिससे वह अब रहने लायक नहीं रहा। बेघर हुए परिवार ने सरकार और जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
20 वर्षों में सबसे बड़ा भूकंप
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश में आए अधिकांश भूकंपों की तीव्रता 2 से 4 रिक्टर स्केल के बीच रही है। लेकिन शुक्रवार रात का 5.0 तीव्रता का झटका पिछले दो दशकों में सबसे अधिक तीव्र और खतरनाक था, जिसने 1905 के कांगड़ा भूकंप की यादें ताजा कर दी हैं। वर्तमान में प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है।
