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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीद का विवाद

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उनके परिवार द्वारा जमीन खरीदने के विवाद में आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनके परिवार ने उज्जैन में 168 एकड़ भूमि खरीदी है। इस भूमि का संबंध महाकाल मंदिर के विकास और अन्य सरकारी परियोजनाओं से है। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीद का विवाद

मुख्यमंत्री मोहन यादव का विवादास्पद भूमि अधिग्रहण


नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव एक विवाद में उलझ गए हैं, जिसमें उनके परिवार द्वारा जमीन खरीदने का मामला सामने आया है। एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र ने रिपोर्ट किया है कि जब से मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, उनके परिवार ने बेहिसाब मात्रा में भूमि खरीदी है। ये भूमि उज्जैन में महाकाल मंदिर के विकास के लिए निर्धारित क्षेत्रों के अलावा उन स्थानों पर स्थित हैं, जहां उनकी सरकार बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाएं चला रही है। इस क्षेत्र में उनके परिवार के पास कुल 335 एकड़ भूमि है।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने इस क्षेत्र में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ है। यह ध्यान देने योग्य है कि मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, और तब से उनके परिवार ने 168 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया है।


रिपोर्ट के अनुसार, शहर में चल रहे विकास कार्यों के कारण इन प्लॉट्स की कीमत में अत्यधिक वृद्धि हुई है। इस जांच में 2026 में हुई खरीद-फरोख्त शामिल नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ये प्लॉट्स मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा, बेटे वैभव और बहू शालिनी यादव के नाम पर हैं। इसके अलावा, मोहन यादव के भाई नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाई गोविंद और नीलेश यादव ने भी प्लॉट्स खरीदे हैं।


मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस रिपोर्ट के प्रकाश में आने के बाद भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर के चंदे की कथित चोरी और महाकाल की भूमि से जुड़े मामलों में संलिप्त है। पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस मामले में खुली छूट दे रखी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये भूमि उज्जैन के आसपास की नई सड़क परियोजनाओं के निकट स्थित हैं या उन क्षेत्रों में हैं जिन्हें उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि से आवासीय या वाणिज्यिक भूमि में परिवर्तित करने के लिए चिह्नित किया गया है।