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20 जुलाई को संसद मार्च: छात्रों का प्रदर्शन overshadow करता है किसान आंदोलन को

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों का प्रदर्शन इतना प्रभावशाली था कि उसने उमर अब्दुल्ला और किसानों के आंदोलन को पीछे धकेल दिया। इस दिन, छात्रों ने सुबह से लेकर शाम तक पुलिस के साथ संघर्ष किया, जबकि किसान नेताओं को पहले ही रोक दिया गया था। जानें इस दिन की घटनाओं और उनके प्रभाव के बारे में।
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संसद चलो का आह्वान


कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जुलाई को संसद चलो का आह्वान किया था, जो मानसून सत्र की घोषणा के साथ ही सामने आया। इसी दिन जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पूर्व राज्य के दर्जे की मांग को लेकर संसद मार्च का ऐलान किया। वहीं, किसानों ने 21 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। उन्हें चिंता है कि अमेरिका के साथ हो रही व्यापार संधि में उनके हितों की अनदेखी हो रही है, जिससे उन्हें नुकसान हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन के विभिन्न समूहों ने 21 जुलाई को दिल्ली चलो का आह्वान किया था, और पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी तैयारी चल रही थी।


छात्रों का प्रदर्शन

हालांकि, 20 जुलाई को छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन इतना बड़ा था कि उसने उमर अब्दुल्ला और किसानों के आंदोलन को पीछे धकेल दिया। छात्रों ने सुबह 11 बजे से संसद मार्च का प्रयास शुरू किया, जो शाम पांच बजे तक जारी रहा। इस दौरान, उन्हें पुलिस के साथ संघर्ष करना पड़ा। कई स्थानों पर पुलिस को लाठियां चलानी पड़ीं और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इस हंगामे के बीच, उमर अब्दुल्ला और उनके समर्थकों ने जंतर मंतर से संसद मार्च करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उनकी मांगें महत्वपूर्ण थीं, लेकिन छात्रों के प्रदर्शन ने उन्हें overshadow कर दिया। किसानों के आंदोलन को भी कम महत्व दिया गया, क्योंकि पुलिस ने पहले ही कई किसान नेताओं को रोक लिया था और उन्हें पंजाब और हरियाणा में हिरासत में ले लिया गया।