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BRICS Summit के लिए विशेष भारतीय Tableware का निर्माण

दिल्ली में होने वाले BRICS Summit के लिए भारतीय कारीगरों ने विशेष सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर तैयार किया है। इस कलेक्शन में पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। लगभग 300 कारीगरों ने इस प्रोजेक्ट में योगदान दिया है, जिसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के लिए अलग-अलग डिज़ाइन शामिल हैं। जानें इस विशेष कलेक्शन की खासियतें और इसके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में।
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दिल्ली में BRICS Summit की तैयारी


दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS Summit के लिए विभिन्न देशों से आने वाले मेहमानों का स्वागत करने की तैयारियां विशेष रूप से की जा रही हैं। भारतीय संस्कृति और कला की झलक हर स्तर पर देखने को मिलेगी, जिसमें भोजन परोसने के तरीके से लेकर सजावट तक शामिल है। इस संदर्भ में, जयपुर के लगभग 300 कारीगरों ने विदेशी मेहमानों के लिए विशेष रूप से सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी तैयार की है।


विशेष कलेक्शन की विशेषताएँ

इस अनोखे कलेक्शन में पारंपरिक भारतीय कारीगरी के साथ आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है। मेहमानों को परोसे जाने वाले भोजन के अनुसार टेबलवेयर के डिज़ाइन को भी अलग-अलग रखा गया है।


300 कारीगरों की मेहनत

अरुण्स ग्रुप के CEO अरुण पाबुवाल और डायरेक्टर अंतरा पाबुवाल के अनुसार, BRICS Summit के लिए तैयार किए गए टेबलवेयर में लगभग 300 कारीगरों ने योगदान दिया है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में चार से पांच महीने का समय लगा, जिसमें डिजाइन तैयार करने से लेकर अंतिम उत्पादन तक कई चरण शामिल थे।


भोजन के अनुसार अलग-अलग डिज़ाइन

BRICS Summit के दौरान मेहमानों को विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए टेबलवेयर का डिज़ाइन तैयार किया गया है। अरुण पाबुवाल के अनुसार, पेय पदार्थों से लेकर मुख्य भोजन और मिठाई तक, हर चरण के लिए विशेष डिज़ाइन बनाए गए हैं।


विशेष उत्पादों की सूची

इस कलेक्शन में कुछ ऐसे उत्पाद भी शामिल हैं जिन्हें कारीगरों ने पहली बार बनाया है। इनमें एक विशेष शॉल ट्रे शामिल है, जिसका उपयोग विदेशी मेहमानों को शॉल या कंबल जैसी वस्तुएं प्रस्तुत करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, एक बड़ा फिंगर बाउल भी इस कलेक्शन का हिस्सा है, जो सामान्य फिंगर बाउल की तुलना में बड़ा है।


डिज़ाइन से उत्पादन तक की प्रक्रिया

इस प्रोजेक्ट में केवल उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि आयोजन की आवश्यकताओं और उसके कॉन्सेप्ट को समझने पर भी जोर दिया गया। कारीगरों और डिजाइन टीम ने विभिन्न डिज़ाइन तैयार किए, जिनमें से पसंद किए गए डिज़ाइन के आधार पर प्रोटोटाइप बनाए गए और फिर उत्पादन शुरू किया गया। इस प्रक्रिया में तीन महीने से अधिक का समय लगा।