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CJP और सरकार के बीच विवाद: संसद में सवालों की अनदेखी

हाल ही में समाप्त हुए संसद के मॉनसून सत्र में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष के सवालों को अनदेखा किया है, जो युवा प्रदर्शनकारियों से जुड़े थे। दास ने सवाल उठाया कि अगर संसद में जवाब नहीं मिलेंगे, तो फिर कहां मिलेंगे? जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और क्या हैं वो सवाल जो अनुत्तरित रह गए हैं।
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CJP और सरकार के बीच टकराव

CJP और सरकार के बीच विवाद: हाल ही में समाप्त हुए संसद के मॉनसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावे की चोरी और दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई जैसे मुद्दों पर काफी हंगामा हुआ। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से इन मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह संसद में विपक्ष की आवाज को दबा रही है। दास ने बताया कि लोकसभा सांसद मथेश्वरन वी.एस. ने CJP के नेतृत्व में प्रदर्शन से जुड़े सवालों के जवाब मांगे थे, जिन्हें सरकार ने खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संसद में जवाब नहीं मिलेंगे, तो फिर कहां मिलेंगे?


सौरव दास ने रविवार को एक्स पोस्ट पर लिखा, "हाल ही में संपन्न लोकसभा सत्र के दौरान, केंद्र सरकार के निर्देश पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हुए युवा विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित तीन सेट के सवालों को मंजूरी नहीं दी गई। लोकसभा सांसद मथेश्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से तीन सेट सवालों (नोटिस रेफरेंस नंबर 101799 और 101801) के माध्यम से जवाब मांगे थे। इन सवालों में शामिल थे: 1. NEET-UG 2026 के लिए आवेदन शुल्क की वापसी 2. सरकार के प्रति जनता का बढ़ता अविश्वास 3. दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों को पीने के पानी और साफ-सफाई की सुविधा न देना 4. प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार का संवाद 5. छात्रों का कल्याण, पेपर लीक और शिक्षा में सुधार 6. शांतिपूर्ण विरोध के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ व्यवहार।"



सौरव दास ने आगे कहा, "फिर भी, नियम 41(2) का हवाला देते हुए इन सवालों को मंजूरी नहीं दी गई; जिसमें नियम के क्लॉज़ (i), (iv), (v), (xviii) और (xxii) शामिल थे। पूरी तरह से जायज़ सवालों के लिए अजीब तर्क दिए गए। अगर संसद में ये सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार को असल में कहाँ जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए? उन महत्वपूर्ण हफ्तों के दौरान गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया?" उन्होंने कहा, "एक सांसद का सरकार से सवाल पूछने का अधिकार कोई मामूली प्रक्रियात्मक बाधा नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की आत्मा है। 'प्रश्नकाल' (Question Hour) इसलिए होता है क्योंकि जिन मंत्रियों के पास जनता की भारी ताकत होती है, उन्हें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को जवाब देना ही होता है। वरना, जाहिर है कि लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। आप संसद की आवाज़ नहीं दबा सकते और न ही उसे अपनी अधूरी नीतियों पर बस रबर-स्टैम्प की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। आप युवाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। भारत के बारे में हमारी सोच ऐसी नहीं है!"