G7 समिट में मोदी और ट्रंप की महत्वपूर्ण बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने G7 समिट में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा आयात और व्यापार समझौते पर चर्चा की। इसके अलावा, मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ भी बैठक की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति पर चर्चा की गई। जानें इस बैठक के प्रमुख बिंदु और भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया उतार-चढ़ाव के बारे में।
| Jun 17, 2026, 19:03 IST
मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (17 जून) फ्रांस के एवियन में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। ट्रंप ने अचानक पीएम मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि मोदी बेहद शांत, संयमित और प्रभावशाली हैं, जबकि उन्होंने खुद को इसके विपरीत बताया। इस बैठक में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिका से ऊर्जा आयात और संभावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा की। इससे पहले मंगलवार को, G7 समिट के आउटरीच सत्र में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की। यह मुलाकात लगभग डेढ़ साल बाद हुई थी।
भारत-अमेरिका संबंधों में उतार-चढ़ाव
भारत और अमेरिका के संबंधों में तब गिरावट आई थी जब अमेरिका ने भारत पर दंडात्मक टैरिफ लगाए थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका को लेकर विवादास्पद दावे किए थे। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के बाद, दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, ओमान के तट पर एक मर्चेंट जहाज पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद रिश्तों में फिर से तनाव आ गया है।
मोदी और जर्मन चांसलर की बैठक
प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ द्विपक्षीय बैठक की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से मुलाकात की। यह दोनों नेताओं के बीच इस वर्ष की दूसरी बैठक थी। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में आई नई गति पर संतोष व्यक्त किया। यह गति चांसलर की भारत यात्रा और भारत-यूरोपीय संघ FTA वार्ता के सफल समापन के कारण आई है। चूंकि भारत और जर्मनी 2026 में अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं, दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, हरित विकास, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर हस्ताक्षर और जर्मनी से होकर गुजरने वाले भारतीय नागरिकों के लिए ट्रांजिट वीज़ा छूट को लागू करने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष शामिल हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए बनी सहमति का भी स्वागत किया।
