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PM मोदी की 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी पर किरेन रिजिजू का स्पष्टीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस पर की गई 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह टिप्पणी विपक्ष के नेताओं के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए थी जो माओवादियों और अलगाववादियों का समर्थन करते हैं। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। जानें इस विवाद के सभी पहलुओं के बारे में।
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दिमागी नक्सल टिप्पणी पर विवाद


दिमागी नक्सल टिप्पणी विवाद: स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस पर विपक्ष के नेता केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर तीखे हमले कर रहे हैं। इस संदर्भ में केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी विपक्ष के नेताओं के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए थी जो माओवादियों और अलगाववादियों का समर्थन करते हैं।


केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पीएम मोदी की 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी के एक दिन बाद एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विपक्ष के नेताओं को 'दिमागी नक्सली' नहीं कहा। 'दिमागी नक्सली' वे लोग हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करते। ये अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं।"


प्रधानमंत्री मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर कहा था, 'हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए विभिन्न प्रयास कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को पहचानना और अलग करना आवश्यक है ताकि देश की युवा पीढ़ी को विकास की दिशा में जोड़ा जा सके। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।