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UPI लेनदेन पर नया शुल्क: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा P2M यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की घोषणा की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आम आदमी की जेब पर एक और बोझ है। उन्होंने महंगाई और डिजिटल भुगतान पर नए टैक्स के खिलाफ आवाज उठाई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की घोषणा


नई दिल्ली। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 15 अक्टूबर से कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाएगा। इस घोषणा के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर आरोप लगाया है।


खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अब मोदी सरकार की लूट UPI तक पहुंच गई है। पहले 'No fees on UPI' था, अब इसे बदलकर '₹2,000 तक के UPI transactions पर no fees' कर दिया गया है। महंगाई के कारण आम आदमी की जेब पहले ही खाली है। थोक महंगाई लगभग 10% है और भाजपा सरकार ने जनता पर 'Digital Payments Tax' लगाकर उनकी बची-कुची बचत को भी नष्ट करने की योजना बना दी है।"




मोदी सरकार के खिलाफ खरगे ने कहा कि 10 साल पहले नोटबंदी के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था। जब नोटबंदी के नकारात्मक प्रभावों पर सवाल उठे, तो सरकार ने इसे डिजिटल भुगतान और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बताया था।


उन्होंने आगे कहा, "वित्त मंत्री ने हाल ही में संसद में कहा था कि UPI पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन कई रिपोर्टों के अनुसार, ₹5,000 के लेनदेन पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 तक की वसूली की जा सकती है। क्या यह सच है? MDR के संदर्भ में, क्या सरकार को यह नहीं पता कि व्यापारी पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ अंततः उपभोक्ताओं से ही वसूला जाएगा? महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय, मोदी सरकार हर दिन उनकी जेब पर डाका डालने का नया तरीका खोज रही है।"


ज्ञात हो कि NPCI ने मंगलवार को यह घोषणा की थी कि 15 अक्टूबर से चुनिंदा P2M यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू होगा। इसके तहत, मर्चेंट्स को ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% शुल्क देना होगा और ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान के लिए अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगा।