अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर के बीच सियासी टकराव
सियासी माहौल में गर्मी
अखिलेश यादव बनाम ओम प्रकाश राजभर: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की हलचल और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के नेता एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं। इसी क्रम में, योगी सरकार के मंत्री और सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा में विभाजन का दावा कर एक नया विवाद खड़ा किया है। राजभर ने गुरुवार को कहा कि सपा में निश्चित रूप से टूट होगी, जिससे अखिलेश यादव को अपने सांसदों को बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए। इस पर अखिलेश ने प्रतिक्रिया दी है।
राजभर का दावा और अखिलेश का जवाब
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सपा के बागी सांसदों का एक समूह जल्द ही बलिया के एक नेता के नेतृत्व में सामने आएगा, जिसका इशारा उन्होंने सनातन पांडे की ओर किया। इस पर अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए राजभर को ‘अफ़वाही’ मंत्री करार दिया। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, 'पंचायती-समाचार: टिकटार्थियों के बाद अधिकारी और ठेकेदार मिलकर कर रहे हैं ‘ढुंढाई पंचायत’... समाचार-विस्तार: कल तक तो ‘अफ़वाही’ मंत्री जी को केवल वो भावी प्रत्याशी ही ढूंढ रहे थे जिनसे इन्होंने टिकट के नाम पर एडवांस वसूल लिया था, लेकिन अब जो जान गये हैं कि ‘30 सीट’ की बात अफ़वाह है। न तो इन्हें एक भी सीट मिल रही है और ले-देकर मिल भी गई तो भी ये जीतनेवाले नहीं हैं।'
अखिलेश का आगे का बयान
अखिलेश यादव ने आगे कहा, 'इनकी सच्चाई बाहर आते ही अब तो सुना है, वो एई, जेई और एएमए अधिकारी और विभागीय ठेकेदार भी इनको ढूंढने के लिए मिल-बैठकर ‘पंचायत’ कर रहे हैं, जिनसे ट्रांसफ़र-पोस्टिंग व कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने के नाम पर इन्होंने एडवांस वसूल लिया है। जिस काली-कमाई के पैसे के बल पर इनके ‘बड़े बोल’ निकल रहे हैं, अब वो पैसा ही इनके ख़िलाफ़ ‘पंचायत’ बैठा रहा है।'
राजनीतिक संकट की पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों और टीएमसी के विधायकों की बगावत के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी में भी टूट का संकट मंडरा रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नौ में से छह लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी है। इस गुट के बाद में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय की संभावना है। ऐसे में ओम प्रकाश राजभर का सपा में टूट का दावा राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने वाला है।
