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अखिलेश यादव का चुनावी रणनीति: पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक पर ध्यान

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों पर ध्यान केंद्रित किया है। पिछले लोकसभा चुनाव में पीडीए कार्ड का सफल उपयोग करने के बाद, वे अब 14 सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि उनका असली लक्ष्य पिछड़ा और दलित समुदाय है, जबकि अल्पसंख्यकों को किनारे किया जा सकता है। इस बार, वे मुस्लिम और यादव वोटों की बजाय सवर्ण हिंदुओं को प्राथमिकता देने की योजना बना रहे हैं।
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अखिलेश यादव की नई चुनावी रणनीति


समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) कार्ड का उपयोग पिछले लोकसभा चुनाव में सफलतापूर्वक किया था। इस रणनीति के माध्यम से उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व कार्ड को चुनौती दी, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पार्टी ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 37 पर जीत हासिल की। कांग्रेस को भी छह सीटें मिलीं। अब, विधानसभा चुनाव की तैयारी में, अखिलेश यादव फिर से पीडीए पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि उनका असली लक्ष्य पिछड़ा और दलित समुदाय है, जबकि अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।


अखिलेश ने विधानसभा चुनाव में 14 सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवारों को उतारने की योजना बनाई है। ध्यान देने योग्य है कि पहले से 84 सीटें दलितों के लिए आरक्षित हैं, और यदि वे 14 और दलित उम्मीदवारों को जोड़ते हैं, तो कुल मिलाकर एससी और एसटी के लिए एक सौ उम्मीदवार होंगे।


पिछले विधानसभा चुनाव में, बसपा प्रमुख मायावती ने एक सौ मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। मुस्लिम वोट सपा को ही मिला। इसलिए, अखिलेश यादव मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में कमी कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में किया था। उन्होंने अपने कोटे की 63 सीटों में से केवल पांच यादव उम्मीदवार दिए थे। कांग्रेस के कोटे में एक भी यादव उम्मीदवार नहीं था। इस बार भी, वे मुस्लिम और यादव वोटों की बजाय पिछड़ा, दलित और सवर्ण हिंदुओं को प्राथमिकता देंगे।