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अखिलेश यादव की कांग्रेस से नाराजगी: सीट बंटवारे पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव कांग्रेस के नेताओं के बयानों से नाराज हैं। खासकर, इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम की मांगों ने उन्हें असंतुष्ट किया है। अखिलेश का मानना है कि अधिक सीटें देने से दोनों पार्टियों को नुकसान होगा। जानें उनकी रणनीति और कांग्रेस की सीटों की मांग के बारे में।
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कांग्रेस के नेताओं के बयानों से नाराज अखिलेश यादव


उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव असंतुष्ट हैं। विशेष रूप से, वे सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद और कांग्रेस के नए प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से नाराज हैं। मसूद लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि सीट बंटवारा जल्द किया जाए और कांग्रेस को अधिक सीटें दी जाएं। वहीं, गौतम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कांग्रेस डेढ़ सौ सीटों से कम पर नहीं लड़ेगी।


2017 में, जब दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, तब अखिलेश ने कांग्रेस के लिए एक सौ से अधिक सीटें छोड़ी थीं, लेकिन परिणामस्वरूप कांग्रेस ने केवल सात और सपा ने 47 सीटें जीती थीं। इस बार, अखिलेश अकेले कम से कम साढ़े तीन सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं।


सूत्रों के अनुसार, बिहार में तेजस्वी यादव द्वारा की गई गलती से अखिलेश सीख लेना चाहते हैं। उन्हें यह समझ है कि यदि वे अधिक सीटों पर लड़ेंगे, तो जीतने की संभावना बढ़ेगी। हालांकि, यदि कांग्रेस को अधिक सीटें दी जाएं, तो दोनों पार्टियों को नुकसान होगा।


अखिलेश यादव ने लगभग साढ़े तीन सौ सीटों पर उम्मीदवारों की छंटनी भी कर ली है। हालांकि, वे कुछ कम सीटों पर लड़ने के लिए भी तैयार हो सकते हैं। उनका पहला प्रस्ताव कांग्रेस को 60 सीटें देने का है, दूसरा प्रस्ताव हर लोकसभा सीट के लिए एक विधानसभा सीट यानी 80 सीटों का है, और तीसरा प्रस्ताव 2024 में लड़ी गई 17 लोकसभा सीटों के हिसाब से प्रति सीट पांच यानी 85 सीटों का है।


सपा की ओर से कहा गया है कि यह अधिकतम प्रस्ताव है और इस बार वे कांग्रेस को तीन अंकों में सीट नहीं देंगे। इसलिए, गौतम द्वारा मांगी गई डेढ़ सौ सीटों की मांग का कोई आधार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश को यह जानकारी मिली है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं के कहने पर गौतम ने अधिक सीटों की मांग की है, जिससे वे और अधिक नाराज हुए और 'इंडिया' ब्लॉक की बैठक से दूरी बना ली।