अखिलेश यादव ने संसद में छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
संसद में छात्रों के मुद्दे पर उठी आवाज
नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने छात्रों से संबंधित मुद्दों पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। लोकसभा में अपने भाषण में उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया और सरकार से सवाल किया, "क्या आप बेटियों के कपड़े फाड़ देंगे?" उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए हंगामा मच गया। अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की सख्ती उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार हुआ, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इस दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और प्रिया सरोज भी उनके साथ उपस्थित रहीं। विपक्षी दलों ने भी छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा और पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की मांग की। सरकार ने कहा कि छात्रों से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए वह तैयार है और तथ्यों के आधार पर सदन को पूरी जानकारी दी जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से संबंधित मामलों में संबंधित एजेंसियां अपने दायित्वों का पालन करती हैं।
अखिलेश यादव का यह बयान अब संसद के बाहर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर उनके भाषण के वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं। विपक्ष इसे छात्रों की आवाज उठाने की कोशिश मान रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा मानता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर बहस तेज होने की संभावना है।
