अजरबैजान के राष्ट्रपति का भारत पर बयान: शांति की ओर बढ़ने का संकेत
भारत की शक्ति का प्रदर्शन
भारत में कुछ लोग यह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी कमजोर हैं और आसानी से हार मान लेते हैं। लेकिन हाल ही में, अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीव ने एक मंच पर खड़े होकर यह स्पष्ट किया कि जब भारत प्रतिशोध लेता है, तो वह कैसे करता है। अलीव का बयान यह दर्शाता है कि भारत डर के आगे और पीछे दोनों तरफ खड़ा है।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अजरबैजान, पाकिस्तान और तुर्की के सहयोग से अपने पड़ोसी देश अर्मेनिया को परेशान कर रहा है। अजरबैजान ने अर्मेनिया के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है और कई बार तुर्की और पाकिस्तान से प्राप्त हथियारों का उपयोग करके अर्मेनिया पर हमले किए हैं। हालाँकि, जब भारत ने अर्मेनिया को आत्मरक्षा के लिए पिनाका रॉकेट लांचर सिस्टम प्रदान किया, तब अलीव ने कहा था कि भारत का कोई भी रॉकेट अर्मेनिया की रक्षा नहीं कर सकता।
अलीव का नया बयान
उस समय भारत ने चुप्पी साधी रखी और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि अर्मेनिया को मजबूत करने में लगा रहा। लेकिन अब, मंच पर खड़े होकर, अलीव ने अर्मेनिया के प्रति अपने रुख में बदलाव दिखाया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने देश से अर्मेनिया जाने वाले सभी सामान पर लगी पाबंदियाँ हटा दी हैं और अर्मेनिया को आवश्यक ईंधन, विशेष रूप से पेट्रोल और डीजल, देना शुरू कर दिया है।
अलीव ने यह भी कहा कि वे शांति की दिशा में बढ़ रहे हैं और शांति को महसूस कर रहे हैं।
भारत के हथियारों का प्रभाव
अर्मेनिया की सड़कों पर भारत के हथियारों को देखकर अजरबैजान अब शांति की बातें कर रहा है। कुछ महीने पहले, अलीव ने कहा था कि भारत अर्मेनिया की रक्षा नहीं कर सकता, लेकिन अब अजरबैजान अर्मेनिया को ईंधन प्रदान कर रहा है।
जब अर्मेनिया ने 20 सालों बाद पहली बार एक मिलिट्री परेड का आयोजन किया, तो उसमें भारत के हथियार शामिल थे, जैसे पिनाका रॉकेट सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, रडार सिस्टम और आर्टिलरी गन्स। भारत ने अर्मेनिया में इजराइल की भी एंट्री करवा दी है। खबरें हैं कि इजराइल, भारत के साथ बातचीत के बाद, तुर्कों द्वारा मारे गए अर्मेनियाई लोगों के नरसंहार को मान्यता देने की योजना बना रहा है।
