अजित पवार की जयंती पर राजनीतिक हलचल और पार्टी में बंटवारा
अजित पवार का निधन और जयंती का महत्व
एनसीपी के प्रमुख नेता अजित पवार का निधन 28 जनवरी को हुआ था। उनकी पहली जयंती 22 जुलाई को मनाई गई। इस अवसर पर राज्य की राजनीति में उनकी पार्टी के भीतर दो गुटों का निर्माण हो गया है। जबकि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी पर नियंत्रण बनाए रखा है, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। तटकरे दिल्ली में मंत्री पद की उम्मीद लगाए हुए हैं।
सुनेत्रा पवार को शरद पवार के खेमे से भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के विलय और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच, एकनाथ शिंदे की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जो मराठा राजनीति में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
जयंती समारोह और राजनीतिक गतिविधियाँ
अजित पवार की पहली जयंती के अवसर पर, सुनेत्रा पवार ने पार्टी की ताकत को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए। राज्य सरकार ने उनके अनुरोध पर 22 जुलाई को एक राजकीय समारोह आयोजित करने की अनुमति दी। इसके साथ ही, पार्टी ने एक हफ्ते तक चलने वाला जन सेवा सप्ताह शुरू किया।
इस दिन, दिल्ली के सभी प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्रों में फुल पेज का विज्ञापन प्रकाशित किया गया। हालांकि, विज्ञापन जारी करने वाले का नाम नहीं लिखा गया था, जो एक रहस्य बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर अजित पवार को याद किया और सोशल मीडिया पर उनके योगदान की सराहना की।
