अडानी समूह को अमेरिका में मिली राहत: न्याय व्यवस्था पर धन का प्रभाव
अडानी समूह के खिलाफ मुकदमा खारिज
अडानी समूह ने अमेरिका में धन की शक्ति का उपयोग करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई जीती है। इस मामले में अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस ने अडानी समूह के खिलाफ घूसखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज करने के लिए सहमति दी। उन्होंने कहा कि 'संघीय अभियोजकों के निर्णय की समीक्षा करने का जज के पास सीमित अधिकार' है। हालांकि, उन्होंने ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग की आलोचना करते हुए कहा कि 'अभियोग खारिज करने में बरती गई अनियमितताएं चिंताजनक हैं।'
जज ने न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैक्कॉटर की कड़ी आलोचना की, यह कहते हुए कि उन्होंने कई संघीय अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय को नजरअंदाज किया। जज ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय विभाग ने अडानी के वकीलों के साथ मिलकर यह निर्णय लिया, जबकि अमेरिकी जांच एजेंसियों, जैसे कि एफबीआई और एसईसी, की सलाह नहीं ली गई।
इससे पहले, जब न्याय विभाग ने केस वापस लेने का अनुरोध किया था, तो जज ने इसे 'कमजोर और सतही' तर्कों पर आधारित बताया था। अब, न्यायाधीश के अंतिम फैसले से यह स्पष्ट है कि न्याय विभाग संतोषजनक उत्तर देने में असफल रहा।
अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में, गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और उनके भतीजे सागर ने 1 करोड़ 20 लाख डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई थी। इस प्रकार, धन की शक्ति के माध्यम से, अडानी समूह ने अमेरिका में भी राहत प्राप्त की है।
