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अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: 25 साल की सजा का मामला

गैंगस्टर अबू सलेम को 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उसकी सजा की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। सलेम का दावा था कि उसकी सजा 2022 में समाप्त हो गई थी, लेकिन अदालत ने इस पर विचार नहीं किया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सलेम के प्रत्यर्पण से जुड़े विवाद के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय


नई दिल्ली: 1993 के मुंबई बम धमाकों के आरोपी गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण झटका मिला है। सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 25 साल की सजा पूरी होने का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सजा की गणना उस समय से की जाएगी, जब उसे भारत में प्रत्यर्पित किया गया था और जेल में भेजा गया था।


बॉम्बे हाईकोर्ट का पूर्व निर्णय

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 11 नवंबर 2005 से 25 साल की सजा की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। अदालत ने अबू सलेम को रिहाई का लाभ देने से इनकार कर दिया। इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट ने अप्रैल में उसकी रिहाई से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सलेम का तर्क था कि 2022 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार उसकी 25 साल की सजा पूरी हो चुकी है।


पुर्तगाल से प्रत्यर्पण का मामला

अबू सलेम को 1993 के मुंबई बम धमाकों और कारोबारी प्रदीप जैन की हत्या के मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए पुर्तगाल से भारत लाया गया था। प्रत्यर्पण के समय भारत सरकार ने पुर्तगाल को आश्वासन दिया था कि सलेम को 25 साल से अधिक की सजा नहीं दी जाएगी। हालांकि, बाद में उसे दोनों मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 13 जुलाई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भारत की ओर से दिए गए आश्वासन को ध्यान में रखते हुए उसकी सजा को 25 साल तक सीमित कर दिया।


हिरासत की तारीख पर विवाद

अबू सलेम का कहना था कि उसकी सजा की अवधि 18 सितंबर 2002 से शुरू होनी चाहिए, जब उसे इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर पुर्तगाल में हिरासत में लिया गया था। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का तर्क है कि उस समय उसे पासपोर्ट से जुड़े एक अलग मामले में पकड़ा गया था, इसलिए उस हिरासत को भारत में दी गई सजा की अवधि में नहीं जोड़ा जा सकता।


1993 के मुंबई धमाकों के मामले में, अबू सलेम को 2017 में TADA की विशेष अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उस पर आरोप था कि उसने धमाकों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों को गुजरात से मुंबई पहुंचाने में मदद की थी। इन धमाकों में 257 लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।