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अमित शाह की संसद में अनुपस्थिति पर उठे सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने हाल ही में मीडिया के सामने बयान दिया कि विपक्ष के हंगामे के कारण वे सदन में नहीं जा सके। इस स्थिति ने उनकी छवि को प्रभावित किया है और यह संदेश दिया है कि उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। जानिए इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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केंद्रीय गृह मंत्री की देरी से प्रतिक्रिया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में चर्चा में भाग लेने में देरी क्यों की, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है। बुधवार को उन्होंने मीडिया के सामने जो बयान दिया और स्पीकर ओम बिरला को जो पत्र लिखा, उसमें उनके तर्क बहुत मजबूत नहीं लगते। उन्होंने कहा कि वे रोज संसद आते थे और अपने कार्यालय में रहते थे, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण वे सदन में नहीं जा सके। यह सोचने वाली बात है कि विपक्ष उसी कारण से संसद नहीं चलने दे रहा था कि अमित शाह सदन में क्यों नहीं आ रहे। यदि वे किसी भी सदन में चले जाते, तो संभवतः विपक्ष का हंगामा खत्म हो जाता।


यह सवाल उठता है कि इस सत्र में 19 बैठकों के दौरान वे एक भी दिन किसी सदन में क्यों नहीं गए? यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद की कार्यवाही में शामिल न होने से यह संदेश गया है कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। कहा जा रहा है कि जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च के मामले को जिस तरह से संभाला गया, उसमें मतभेद हैं। जंतर मंतर की घटना के बाद अमित शाह की संसद से दूरी ने उनकी छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। उनकी छवि हमेशा से सामने आकर समस्याओं का सामना करने की रही है, लेकिन इस बार वे संसद की कार्यवाही से दूर नजर आए।