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अमित शाह ने उत्तराखंड चुनाव के लिए 65 सीटों का लक्ष्य रखा

अमित शाह ने उत्तराखंड में आगामी चुनावों के लिए 65 सीटें जीतने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण है, खासकर एंटी इन्कंबेंसी के माहौल में। पिछले चुनावों में भाजपा ने 47 सीटें जीती थीं, और अब शाह ने तीन चौथाई सीटें जीतने की योजना बनाई है। जानें इस चुनावी रणनीति के पीछे की कहानी और भाजपा के नेताओं की प्रतिक्रिया।
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अमित शाह का चुनावी लक्ष्य


अमित शाह की विशेषता यह है कि वे कभी भी छोटे लक्ष्य नहीं रखते। हाल ही में उत्तराखंड में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली में भाग लेते हुए, उन्होंने अगले चुनाव में 65 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया। यह ध्यान देने योग्य है कि उत्तराखंड में तीन महीने बाद चुनाव होने वाले हैं, जहां भाजपा लगातार तीसरी बार जीतने की कोशिश कर रही है। पिछले 10 वर्षों में सरकार के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी का माहौल भी बना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता भी पहले जैसी नहीं रही है। फिर भी, अमित शाह ने तीन चौथाई से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। भाजपा के नेता इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और मानते हैं कि 36 सीटों का बहुमत पार करना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।


पिछले चुनाव में, यानी 2022 में, भाजपा को 47 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। बसपा को दो सीटें मिली थीं। भाजपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2017 में रहा, जब उसने 57 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के पांच साल के शासन में कई प्रयोग हुए थे, जिसमें हरीश रावत की जगह विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन बाद में रावत फिर से मुख्यमंत्री बने। इससे पार्टी में विभाजन हुआ, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। उस समय भी भाजपा ने 57 सीटें जीती थीं और कांग्रेस केवल 11 सीटों पर सिमट गई थी। इस बार शाह ने 70 में से 65 सीटों का लक्ष्य रखा है, जिसे भाजपा के नेता असंभव मानते हैं। हालांकि, अन्य राज्यों में ऐसे परिणाम देखने को मिले हैं, जैसे कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने 2015 में 70 में से 67 सीटें जीती थीं।