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अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप का बड़ा ऐलान, ईरानी फंड से वसूली की योजना

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की जब्त की गई संपत्तियों से अमेरिकी नुकसान की भरपाई का ऐलान किया है। ईरान ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं। जानें इस जटिल स्थिति का पूरा विवरण और इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।
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मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव

वॉशिंगटन/बगदाद। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौता समाप्त होने के बाद से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। ईरान, इराक समेत कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है कि ईरान की जब्त की गई संपत्तियों से अमेरिकी संपत्तियों को हुए नुकसान का हर्जाना वसूला जाएगा।


ट्रंप का सोशल मीडिया पर ऐलान

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी जहाजों और संपत्तियों को जो भी नुकसान होगा, उसकी भरपाई ईरान के फ्रीज फंड से की जाएगी। उन्होंने इसे 'न्यायसंगत और उचित' कदम बताया है।


ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान ने जताई कड़ी आपत्ति

ट्रंप के इस निर्णय पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे एक खतरनाक और 'भड़काऊ मिसाल' करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी संप्रभु देश की संपत्ति को इस तरह से जब्त करना अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में अराजकता पैदा कर सकता है।


अमेरिकी ठिकानों पर हमले

इराक समेत कई देशों में अमेरिकी अड्डों पर हमले

युद्धविराम के टूटने के बाद से इराक और उसके आस-पास अमेरिकी सेना को कई हमलों का सामना करना पड़ा है। इराक के इरबिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे हवाई अड्डे पर उड़ानों को रोकना पड़ा। हालांकि, अमेरिकी सेना ने कई ड्रोन को नष्ट कर दिया। इसके अलावा, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में भी अमेरिकी नौसेना के ठिकानों पर ईरान द्वारा हमले किए गए हैं।


अमेरिका की जवाबी कार्रवाई

अमेरिका की भीषण जवाबी कार्रवाई

इन हमलों के जवाब में, अमेरिकी वायुसेना ईरान के भीतर बमबारी कर रही है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल डिपो और ड्रोन लॉन्च पैड्स सहित 80 से अधिक सैन्य ढांचों को नष्ट कर दिया है। इस सैन्य टकराव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।