अमेरिका-ईरान समझौता: ट्रंप का ऐलान और नेतन्याहू की चुनौती
ट्रंप का ऐलान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लगभग अंतिम चरण में है। उन्होंने यह भी बताया कि वाशिंगटन ईरान पर लगाए गए अपने नौसैनिक घेराबंदी को समाप्त करेगा। ट्रंप ने इसे महीनों की बातचीत का परिणाम बताते हुए इसे एक बड़ी सफलता करार दिया। इस घटनाक्रम ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।
समझौते की प्रक्रिया
ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "यह शानदार डील पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगी।" ट्रंप ने कहा कि शुक्रवार को डील पर हस्ताक्षर के बाद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की अनुमति दी जाएगी और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश दिया जाएगा।
ईरान का दावा
ईरानी सरकारी मीडिया ने यह दावा किया है कि तेहरान ने अमेरिका को झुकने पर मजबूर कर दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी युद्धविराम की पुष्टि की है और बताया है कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर समारोह होगा। यह घोषणा पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाली है, खासकर जब कुछ घंटे पहले ही बेरुत पर हमले की खबरें आई थीं।
नेतन्याहू पर ट्रंप का हमला
ट्रंप ने नेतन्याहू पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "बेहद मुश्किल आदमी" बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल को अमेरिका का आभार व्यक्त करना चाहिए, क्योंकि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता, तो इजराइल की स्थिति गंभीर हो जाती। यह बयान अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है।
समझौते की बाधाएं
समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा लेबनान बना हुआ था। इजराइल चाहता था कि लेबनान को अमेरिका-ईरान समझौते से बाहर रखा जाए, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया कि लेबनान पर हमले बंद होने तक कोई युद्धविराम संभव नहीं है। इजराइली सेना द्वारा बेरुत में हमले ने समझौते को संकट में डाल दिया। ट्रंप ने इस हमले को गैरजिम्मेदाराना बताया।
समझौते के बिंदु
ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने समझौते के 14 सूत्रीय मसौदे का दावा किया है, जिसमें स्थायी युद्धविराम और अमेरिका द्वारा नौसैनिक घेराबंदी हटाने की बात की गई है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा और नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इसके बदले, ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यह समझौता मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को बदल सकता है। इजराइली मीडिया के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप से स्पष्ट कर दिया है कि इजराइल लेबनान के प्रावधान को नहीं मानेगा। इस प्रकार, क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है।
मध्य पूर्व की राजनीति
मध्य पूर्व की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां दोस्त और दुश्मन की सीमाएं धुंधली हो रही हैं। ट्रंप शांति के सूत्रधार बनने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू खुली चुनौती दे रहे हैं। ईरान इस समझौते को अपनी जीत मानते हुए अमेरिका को झुकने का संदेश देना चाहता है। अब सभी की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर है।
