अमेरिका-ईरान समझौता: डेमोक्रेट्स ने इसे राजनीतिक गलती बताया
अमेरिका की स्थिति कमजोर हुई
कहा, युद्ध से पहले की स्थिति से अब अमेरिका ज्यादा कमजोर दिख रहा
US-Iran Agreement, वॉशिंगटन : पिछले तीन महीनों से चल रहे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का अंत हो चुका है। भारतीय समयानुसार आज सुबह लगभग पांच बजे दोनों देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। पहले यह समझौता 19 जून को होने वाला था। इस समझौते के साथ ही पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है।
हालांकि, अमेरिका के विपक्षी सांसदों ने इसे ट्रंप और अमेरिका की हार के रूप में देखा है। अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट सांसदों ने इस शांति समझौते की कड़ी आलोचना की है। सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने कहा कि यह समझौता अमेरिका की सबसे बड़ी राजनीतिक गलतियों में से एक के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि युद्ध से पहले की तुलना में अमेरिका अब अधिक कमजोर स्थिति में है और ट्रंप ने ईरान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
समझौते से अमेरिका को कोई लाभ नहीं
डेमोक्रेट सांसद मार्क वॉर्नर, रिचर्ड ब्लूमेंथल और पीटर वेल्च ने भी इस समझौते पर सवाल उठाए। उन्होंने ईरान को 300 अरब डॉलर की कथित फंडिंग और होर्मुज पर ईरान के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि इस समझौते में ईरान को अधिक रियायतें दी गई हैं, जबकि अमेरिका को कोई लाभ नहीं मिला। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईरान को बातों से नहीं, बल्कि काम से परखा जाएगा।
अमेरिका-ईरान को एक पैसा भी नहीं देगा : वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने स्पष्ट किया है कि 300 अरब डॉलर के पैकेज की खबरें भ्रामक हैं। यदि ईरान शर्तें मानता है, तो अन्य देश निवेश कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका पैसा नहीं देगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें केवल वादों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई पर जोर दिया गया है। एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि नई ईरानी सरकार का आकलन उसके बयानों से नहीं, बल्कि इस आधार पर किया जाएगा कि वह वास्तव में क्या कदम उठाती है। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और पूरी अमेरिकी सरकार उन घटनाओं से बेहद परेशान थी, जिनमें कुछ महीने पहले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई थी।
