अमेरिका का अगला लक्ष्य: क्यूबा पर संभावित सैन्य कार्रवाई
क्यूबा पर अमेरिका की नजर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के बाद उनका अगला ध्यान क्यूबा पर हो सकता है। क्यूबा, जिसे कैरेबियन क्रोकोडाइल के नाम से भी जाना जाता है, अपने आकार के कारण इस नाम से प्रसिद्ध है। ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला और ईरान में संघर्ष समाप्त करने के बाद, क्यूबा पर उनकी अगली कार्रवाई हो सकती है। एक स्वतंत्रता दिवस समारोह में, ट्रंप ने अपनी सेना की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को खत्म करने में उन्हें केवल एक घंटा लगा था। उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला का मामला भी सुलझ चुका है और आगे की योजनाएं हैं।
क्यूबा की स्थिति
ट्रंप ने मार्च में कहा था कि उन्होंने एक मजबूत सेना बनाई है, जिसका कभी-कभी उपयोग करना पड़ता है। क्यूबा, वेनेजुएला की तरह, अमेरिकी सैन्य तैनाती का सामना कर रहा है। यह देश पहले से ही अमेरिकी नाकेबंदी का शिकार है, जिससे ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है। हालांकि, क्यूबा के नेता ट्रंप की मांगों को मानने के लिए तैयार दिख रहे हैं और आर्थिक सुधारों का वादा कर रहे हैं।
ट्रंप का क्यूबा पर कब्जा करने का कारण
ट्रंप क्यूबा पर कब्जा करने के लिए तीन मुख्य कारण बताते हैं। पहला, क्यूबा की अमेरिका से निकटता, जो केवल 145 किलोमीटर दूर है। दूसरा, क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार, जो अमेरिका की विचारधारा का विरोध करती है। तीसरा, ट्रंप का 1959 में क्यूबा में अमेरिका विरोधी सरकार की स्थापना का बदला लेना।
67 साल पुराना विवाद
1959 में फिडल कास्ट्रो के नेतृत्व में क्यूबा में क्रांति हुई, जिसने अमेरिका समर्थित तानाशाह बतिस्ता को सत्ता से हटा दिया। इसके बाद क्यूबा ने समाजवादी रास्ता अपनाया और अमेरिकी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया, जिससे अमेरिका नाराज हो गया। उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चल रहा था। क्यूबा की नई कम्युनिस्ट सरकार ने सोवियत संघ के साथ संबंध मजबूत किए, जिससे अमेरिका ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए। 1961 में, अमेरिका की सीआईए ने क्यूबा में बे ऑफ पिग्स ऑपरेशन चलाया, जो असफल रहा और इसे अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी असफलताओं में से एक माना गया।
