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अमेरिका का रूस पर नया दबाव: तेल संकट और भारत की चिंताएँ

अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। अमेरिका ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है, जिससे भारत की सस्ती तेल खरीद प्रभावित हो सकती है। G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा हमला किया जा सकता है। जानें इस स्थिति का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा और वैश्विक तेल बाजार में क्या हलचल मच सकती है।
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अमेरिका का रूस पर नया दबाव: तेल संकट और भारत की चिंताएँ

अमेरिका और रूस के बीच बढ़ता तनाव

ईरान के साथ लंबे समय तक चले तनाव के बावजूद अमेरिका को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। महंगाई, आर्थिक दबाव और तेल संकट की चिंताओं के बीच, वाशिंगटन अब रूस के खिलाफ एक नई रणनीति बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। यह सवाल उठता है कि जब अमेरिका अभी भी ईरान संकट से उबर नहीं पाया है, तो वह रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा क्यों कर रहा है। फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा हमला किया जा सकता है, जिसका सीधा असर भारत की आर्थिक स्थिति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।


ट्रंप का नया प्लान: रूस पर दबाव

ईरान युद्ध के दौरान, दुनिया को सबसे बड़ा डर था कि तेल की आपूर्ति बाधित हो जाएगी और कीमतें आसमान छूने लगेंगी। इसी कारण अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने में राहत दी थी, ताकि बाजार में तेल की कमी न हो। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं। होर्मोज़ जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही सामान्य होने लगी है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन रूस को मिलने वाली राहत को समाप्त करने की योजना बना रहा है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि अमेरिका फिर से रूस की आय पर चोट करना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध में मॉस्को पर दबाव बढ़ाया जा सके। G7 देशों ने भी इस दिशा में कदम उठाने का निर्णय लिया है।


भारत की चिंताएँ

भारत की समस्याएँ इस स्थिति में बढ़ती हैं। पिछले कुछ महीनों में, भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में तेल की कीमतें स्थिर रहीं। लेकिन यदि अमेरिका रूस पर फिर से कड़े प्रतिबंध लागू करता है, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल खरीदना कठिन हो सकता है। भुगतान और शिपिंग से संबंधित कई समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। 17 जून की डेडलाइन पर सभी की नजरें टिकी हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि रूसी तेल पर दी गई अमेरिकी छूट की समय सीमा 17 जून को समाप्त हो रही है। यदि इसे बढ़ाया नहीं गया, तो वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच सकती है।