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अमेरिका ने RAF फेयरफोर्ड से B-1 बॉम्बर विमानों को वापस बुलाया

अमेरिका ने ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड से सभी B-1 बॉम्बर विमानों को वापस बुला लिया है, जो एक नए सुरक्षा खतरे के बीच हुआ है। यह कदम तब उठाया गया जब ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियां एक कथित ईरानी साजिश की जांच कर रही थीं। इस घटनाक्रम में पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी भी शामिल है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और ईरान ने क्या प्रतिक्रिया दी है।
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सुरक्षा खतरे के बीच अमेरिकी बॉम्बर विमानों की वापसी

ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड सैन्य ठिकाने पर नए सुरक्षा खतरों की आशंका के चलते अमेरिका ने अपने सभी लंबी दूरी के B-1 बॉम्बर विमानों को वापस बुला लिया है। इन विमानों को सुरक्षित रूप से अमेरिका में उनके मूल ठिकाने पर भेजा गया है। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियां इस एयरबेस को निशाना बनाने की संभावित ईरानी साजिश की जांच कर रही हैं।


एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि RAF फेयरफोर्ड में तैनात सभी बॉम्बर विमानों को अब अमेरिका में उनके होम बेस पर वापस भेज दिया गया है। अधिकारी ने मीडिया को बताया, "हम पुष्टि कर सकते हैं कि सभी अमेरिकी बॉम्बर विमानों को वापस भेजा गया है।"


अमेरिका ने इस नए खतरे के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है और न ही यह बताया है कि क्या इसका संबंध ब्रिटेन में चल रही ईरानी साजिश से है। एक सूत्र ने इस घटनाक्रम को "वास्तविक घटना" बताया है।


बॉम्बर विमानों की वापसी का महत्व

बॉम्बर विमानों को अमेरिका वापस भेजने का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना के लिए ऐसे विमानों को किसी अन्य बेस पर भेजने के बजाय सीधे होम बेस पर वापस बुलाना असामान्य है। यह वापसी RAF फेयरफोर्ड के आसपास सुरक्षा की कड़ी जांच और ब्रिटेन में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए खतरे के माहौल के बीच हुई है।


RAF फेयरफोर्ड अमेरिकी ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के लिए एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल लोकेशन रहा है, जिसका उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में शामिल B-1 बॉम्बर विमानों की तैनाती के लिए किया गया है। इस प्रकार, यह वापसी ब्रिटिश बेस से अमेरिकी लंबी दूरी के स्ट्राइक विमानों की तैनाती में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।


कथित ईरानी साजिश के संदर्भ में गिरफ्तारियां

यह घटनाक्रम पिछले महीने ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा RAF फेयरफोर्ड को निशाना बनाने की कथित ईरानी साजिश के सिलसिले में की गई गिरफ्तारियों के बाद सामने आया है। पुलिस ने 27 सितंबर को एयरबेस के पास आतंकवाद और विस्फोटक से जुड़े अपराधों के संदेह में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। ये संदिग्ध ब्रिटिश नागरिक थे, जिनकी उम्र 23 से 25 साल के बीच थी।


उन्हें बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान तीन वैन की तलाशी ली गई, लेकिन उनमें कोई विस्फोटक नहीं मिला।


ट्रंप की आलोचना और ईरान का इनकार

पांच लोगों की ज़मानत पर रिहाई की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आलोचना की। ट्रंप ने कहा, "मैं ऐसा नहीं करता।" इसके बाद, ब्रिटिश अधिकारियों ने एक और संदिग्ध को गिरफ्तार किया, जो 25 साल का ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाला व्यक्ति है। इन गिरफ्तारियों के कारण RAF फेयरफोर्ड के आस-पास सुरक्षा स्थिति पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।


इस बीच, ईरान ने आरोपों को खारिज कर दिया है और किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है। तेहरान ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और ब्रिटिश राजदूत को तलब किया।


RAF फेयरफोर्ड का महत्व

RAF फेयरफोर्ड एक ब्रिटिश सैन्य एयरबेस है, जिसका उपयोग अमेरिका लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों की तैनाती के लिए करता रहा है। US ग्लोबल स्ट्राइक कमांड को सहयोग देने में इसकी भूमिका ने इसे यूरोप में अमेरिकी रणनीतिक एविएशन ऑपरेशन्स के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बना दिया है। सभी बॉम्बर विमानों का अपने अमेरिकी होम स्टेशनों पर लौटना हालिया तैनाती के पैटर्न में एक उल्लेखनीय बदलाव है।