Newzfatafatlogo

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता विवाद का अंत, सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित विवाद का समाधान हो गया है, जब सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश को खारिज कर दिया। यह निर्णय लाखों प्रवासी परिवारों, विशेषकर भारतीय मूल के लोगों के लिए राहत का कारण बना है। ट्रंप का आदेश, जो बिना वैध दस्तावेज वाले प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता से वंचित करने का प्रयास था, को अदालत ने अस्वीकार कर दिया। इस फैसले का व्यापक प्रभाव पड़ेगा, खासकर उन परिवारों पर जो अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, इसे अमेरिका की समावेशी पहचान को मजबूत करने वाला बताया है।
 | 

सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित विवाद अब काफी हद तक समाप्त हो गया है। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जन्म के आधार पर नागरिकता की व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया था। इस निर्णय को लाखों प्रवासी परिवारों, खासकर भारतीय मूल के लोगों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है.


ट्रंप का विवादास्पद आदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद कई नए आदेश जारी किए थे। इनमें से एक महत्वपूर्ण आदेश यह था कि बिना वैध दस्तावेज वाले प्रवासियों और अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रहने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं दी जाएगी। इस आदेश को कई राज्यों, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने अदालत में चुनौती दी थी.


सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ ने ट्रंप के आदेश को छह के मुकाबले तीन मतों से खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था पिछले लगभग 150 वर्षों से लागू है और इसका मूल आधार जन्मस्थान है, न कि माता-पिता की इमीग्रेशन स्थिति.


संविधान का संरक्षण

मुख्य न्यायाधीश ने अपने फैसले में बताया कि अमेरिकी संविधान के चौदहवें संशोधन का उद्देश्य इस देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को समान अधिकार देना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय कोई नया सिद्धांत नहीं बना रहा, बल्कि लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को बनाए रख रहा है.


प्रवासी परिवारों पर प्रभाव

इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव उन लाखों प्रवासी परिवारों पर पड़ेगा जो अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है। यदि ट्रंप का आदेश लागू होता, तो उनके बच्चों की नागरिकता को लेकर गंभीर अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती थी.


भारतीय-अमेरिकी संगठनों की प्रतिक्रिया

भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत किया है। चिंतन पटेल, जो भारतीय-अमेरिकी संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक हैं, ने इसे अमेरिका की समावेशी पहचान को मजबूत करने वाला फैसला बताया.


राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि ट्रंप का आदेश संविधान की भावना के खिलाफ था और इससे हजारों बच्चों के अधिकार प्रभावित हो सकते थे.


जन्म पर्यटन पर कार्रवाई

हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि जन्म पर्यटन के मामलों पर कार्रवाई जारी रहेगी। जन्म पर्यटन उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोई महिला केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाकर प्रसव कराती हैं.


भारतीय समुदाय पर प्रभाव

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग निवास कर रहे थे। इनमें से लगभग 51 प्रतिशत लोग अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या अभी भी विभिन्न प्रकार के वीजा पर रह रही है. सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला भारतीय समुदाय सहित लाखों प्रवासी परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक राहत लेकर आया है.