अमेरिका में भारतीय मूल के मतदाताओं का चुनावी रुख: ट्रंप की नीतियों का प्रभाव
भारतीय मूल के मतदाताओं का चुनावी निर्णय
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, आठ नवंबर - हाल ही में हुए चुनावों में अमेरिका में भारतीय मूल के मतदाताओं ने विदेश नीति या भारत के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण के बजाय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों के खिलाफ मतदान किया। यह जानकारी मतदान के रुझानों का विश्लेषण करने वाली विशेषज्ञ सुमित्रा बद्रीनाथन ने दी। उन्होंने बताया कि ट्रंप की आव्रजन नीतियों के बावजूद, भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अब भी पढ़ाई और करियर के लिए अमेरिका को यूरोपीय देशों की तुलना में बेहतर मानते हैं।
सर्वेक्षण के निष्कर्ष
‘अमेरिकन यूनिवर्सिटी’ में राजनीति विज्ञान की सहायक प्रोफेसर बद्रीनाथन ने कहा, ‘‘हमने भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों से यह सवाल किया कि क्या उनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि उनके नेता भारत के प्रति क्या दृष्टिकोण रखते हैं। उनका उत्तर हमेशा ‘नहीं’ होता है।’’ बद्रीनाथन ने ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के मिलन वैष्णव के साथ मिलकर ‘इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे’ का संचालन किया, जिसका उद्देश्य यह समझना है कि अमेरिका में भारतीय मूल के लोग चुनावी राजनीति को किस दृष्टिकोण से देखते हैं।
मध्यावधि चुनावों में परिणाम
हाल के मध्यावधि चुनावों में, भारतीय मूल के छह अमेरिकी उम्मीदवारों ने प्रतिनिधि सभा में स्थान प्राप्त किया, जबकि 30 से अधिक उम्मीदवारों ने विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं और अन्य सार्वजनिक पदों पर जीत हासिल की। इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी स्थिति खो दी, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत प्राप्त किया। इस प्रकार, ट्रंप अपने कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में एक ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं जिनकी राजनीतिक शक्ति काफी सीमित हो गई है।
महंगाई और चुनावी परिणाम
ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई से लोगों में नाराजगी है, जो उनकी पार्टी की हार का कारण बनी। हालांकि, बद्रीनाथन ने कहा कि केवल महंगाई और तेल की ऊंची कीमतों को हार का कारण बताना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के लिए भी वही मुद्दे महत्वपूर्ण हैं जो अन्य अमेरिकी नागरिकों के लिए हैं, जैसे रोजगार, अर्थव्यवस्था और जीवनयापन की लागत।
टेक्सास में चुनावी माहौल
टेक्सास, जहां भारतीय मूल के लोगों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, में चुनाव प्रचार के दौरान भारत विरोधी भावनाएं प्रमुख रहीं। रिपब्लिकन नेता बो फ्रेंच की टिप्पणियों पर राजनीतिक दलों के बीच व्यापक नाराजगी देखी गई। बद्रीनाथन ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि केवल बो फ्रेंच की सोशल मीडिया पोस्ट के कारण लोगों ने किसी विशेष पार्टी के पक्ष या विपक्ष में मतदान किया।
भविष्य की नीतियों पर अनिश्चितता
बद्रीनाथन ने यह अनुमान लगाने से इनकार किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी, जो अब प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत में है, भारत के प्रति किस प्रकार की नीतियां अपनाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक नए दौर की शुरुआत है। यह कहना कठिन है कि डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत नीतिगत फैसलों में तब्दील होगा या राजनीतिक गतिरोध पैदा करेगा।’’
अमेरिका में पढ़ाई की रुचि
बद्रीनाथन ने कहा कि सख्त आव्रजन नीतियों और भारतीयों के साथ भेदभाव के बावजूद, अमेरिका में पढ़ाई करने की रुचि अब भी काफी अधिक है।
