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अमेरिकी कांग्रेस के नए कानून का भारत पर प्रभाव: विद्या भूषण सोनी की राय

पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' के भारत पर प्रभाव का विश्लेषण किया है। उन्होंने बताया कि यह कानून भारत के रूस से ऊर्जा आयात को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में रियायतें हासिल करने के लिए एक रणनीतिक दबाव बनाने का उपाय है। सोनी ने इस बिल के पारित होने के पीछे की राजनीतिक सहमति और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की। जानें इस कानून के पीछे के इरादे और भारत की स्थिति के बारे में।
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अमेरिकी कांग्रेस का नया कानून और भारत की स्थिति

पूर्व राजनयिक विद्या भूषण सोनी ने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा लिंडसे ओ ग्राहम द्वारा पेश किए गए 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' को एक रणनीतिक दबाव बनाने का उपाय बताया है। इस कानून का उद्देश्य भारत के रूस से ऊर्जा आयात को कम करना और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में रियायतें प्राप्त करना है। सोनी ने इस बिल के जियोपॉलिटिकल प्रभावों और भारत की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।


वाशिंगटन में विधायी प्रक्रिया पर बात करते हुए, सोनी ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि कैसे यह बिल कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित हुआ। उन्होंने बताया कि कुछ डेमोक्रेट्स ने इसका समर्थन किया, जो आमतौर पर भारत के पक्ष में रहे हैं। प्रमुख सांसदों ने 'रिपब्लिकन के साथ सहयोग' किया, जिससे यह बिल पारित हो गया। अब यह कानून बन चुका है और इसके खिलाफ कुछ नहीं किया जा सकता।


सोनी ने भारतीय नीति-निर्माताओं के बीच 100% टैरिफ के खतरे को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बिल एक 'इनेबलिंग मेज़र' के रूप में कार्य करता है, न कि अपने-आप लागू होने वाले व्यापार दंड के रूप में।


उन्होंने कहा कि बिल का पारित होना यह नहीं दर्शाता कि इसे तुरंत लागू किया जाएगा। राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे अमेरिका के हित में उचित कदम उठाएं। हालांकि, यह पूरी तरह से राष्ट्रपति की विवेकाधीनता पर निर्भर करेगा कि वे इसका कितना उपयोग करते हैं।


सोनी ने वाशिंगटन के इरादों का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह कदम 'दबाव बनाने का तरीका' है। पहला, अमेरिका रूस से कच्चे तेल के आयात को कम करना चाहता है, जो नई दिल्ली की आर्थिक आवश्यकताओं से टकराता है। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति ऐसी है कि इसे पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकता।


दूसरी ओर, सोनी ने कांग्रेस के आक्रामक रुख को भारत-अमेरिका के बीच अटके हुए व्यापार समझौते से जोड़ा। उन्होंने बताया कि बातचीत तब रुक गई जब अमेरिका ने अंतिम समय में ऐसी शर्तें रखीं जो भारतीय प्रतिनिधियों को स्वीकार्य नहीं थीं। इसलिए, यह भी एक कारण है कि अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है।