अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक भारत लौटे, अदालत में पेश हुए
मैथ्यू वैनडाइक की भारत वापसी
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक, जिन्हें एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति मिली थी, अब भारत लौट आए हैं। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली की अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। एक सूत्र के अनुसार, पिछले महीने अदालत ने वैनडाइक को निर्देश दिया था कि उन्हें भारत लौटने के 72 घंटों के भीतर अदालत में पेश होना होगा। सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वह अभी अदालत में औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। हालांकि, वैनडाइक के साथ गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिक अभी तक वापस नहीं आए हैं।
दिल्ली की अदालत ने पिछले महीने वैनडाइक और उन छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने-अपने देशों में लौटने की अनुमति दी थी, लेकिन यह शर्त रखी थी कि उन्हें जांच में फिर से शामिल होना होगा। इन सभी को मार्च में 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सितंबर में दायर चार्जशीट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इन धाराओं को हटा दिया।
चार्जशीट में बदलाव
NIA ने अपनी चार्जशीट में सभी आरोपियों पर केवल 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट' के तहत आरोप लगाए हैं, जो एक ऐसा अपराध है जिसे जुर्माना भरकर सुलझाया जा सकता है। वैनडाइक ने इस अधिनियम के तहत उल्लंघनों के लिए जुर्माना अदा किया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें डिफ़ॉल्ट ज़मानत दी। एजेंसी ने पिछले महीने कहा था कि UAPA के तहत जांच अभी भी जारी है। गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों में हर्बा पेट्रो, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमनोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिन्स्की शामिल हैं।
म्यांमार में प्रशिक्षण कार्यक्रम
NIA ने पहले आरोप लगाया था कि सभी आरोपी वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना मिजोरम के रास्ते म्यांमार में अवैध रूप से दाखिल हुए थे। वहां उन्होंने म्यांमार के सैन्य शासन के खिलाफ लड़ रहे जातीय सशस्त्र समूहों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। एजेंसी के अनुसार, इन सातों ने लगभग तीन महीनों तक म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों, जैसे कि चिन नेशनल फ्रंट (CNF) और काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA), के सदस्यों को ड्रोन युद्ध, संचालन, असेंबली और जैमिंग तकनीक का प्रशिक्षण दिया। NIA ने यह भी आरोप लगाया कि वैनडाइक और अन्य को CNF सदस्यों से लॉजिस्टिक सहायता प्राप्त हुई थी, और इस मिशन के लिए फंड की व्यवस्था म्यांमार स्थित एक विद्रोही समूह के कमांडर ने की थी।
