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असम के मुख्यमंत्री ने जगन्नाथ स्नान यात्रा पर दी शुभकामनाएं

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा के अवसर पर देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पवित्र अवसर पर शांति, सुख और समृद्धि की प्रार्थना की। स्नान यात्रा, जिसे देबा स्नान पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। जानें इस अनुष्ठान का महत्व और असम में इसे मनाने की परंपरा के बारे में।
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जगन्नाथ स्नान यात्रा का महत्व

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को भगवान जगन्नाथ की पवित्र स्नान यात्रा के अवसर पर देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के लिए शांति, सुख, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की।


मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को नमन करते हुए इस वार्षिक अनुष्ठान को हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा, 'स्नान यात्रा के पवित्र अवसर पर लाखों लोग भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के चरणों में विनम्रता से नमन करते हैं।'


उन्होंने प्रार्थना की कि देवताओं का आशीर्वाद हर घर में सुख और खुशहाली लाए।


मुख्यमंत्री ने लिखा, 'परमेश्वर की अनंत कृपा हर जीवन को सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि से भर दे। जय जगन्नाथ।'


स्नान यात्रा, जिसे देबा स्नान पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू महीने ज्येष्ठ की पूर्णिमा को मनाई जाती है और यह भगवान जगन्नाथ से जुड़े प्रमुख अनुष्ठानों में से एक है।


इस अवसर पर, मंदिर परिसर में विशेष कुएं से निकाले गए 108 घड़ों के पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं का विधिपूर्वक स्नान कराया जाता है।


यह अनुष्ठान मुख्य रूप से ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा है, जहां हर साल हजारों भक्त देवताओं के स्नान को देखने के लिए एकत्र होते हैं।


परंपरा के अनुसार, विस्तृत स्नान अनुष्ठान के बाद ऐसा माना जाता है कि देवता बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें 'अनसारा' नामक पखवाड़े के लिए सार्वजनिक दर्शन से दूर रखा जाता है। इस दौरान मंदिर के पुजारी विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिसके बाद वार्षिक रथ यात्रा के दौरान देवता भक्तों के दर्शन के लिए पुनः प्रकट होते हैं।


स्नान यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक उत्साह के साथ मनाई जाती है, जिसमें असम भी शामिल है, जहां जगन्नाथ मंदिर इस अवसर को मनाने के लिए विशेष प्रार्थना, भक्ति कार्यक्रम और सामुदायिक भोज का आयोजन करते हैं।