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आगरा के शोभिक गोयल का बड़ा फर्जीवाड़ा: हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट निकली फर्जी

आगरा के नटवरलाल शोभिक गोयल का एक नया फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें उनकी हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं। शिकायत के बाद की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि गोयल के नाम पर जारी अनुक्रमांक अन्य परीक्षार्थियों के थे। इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि इन दस्तावेजों का उपयोग कैसे किया गया और इस फर्जीवाड़े में कौन शामिल है। जानें पूरी कहानी में क्या है।
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फर्जीवाड़े का खुलासा

लखनऊ। आगरा के नटवरलाल शोभिक गोयल के खिलाफ एक और बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। उनके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट फर्जी पाई गई हैं। शिकायत के बाद इस मामले की जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि गोयल की मार्कशीट असली नहीं हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के मेरठ कार्यालय द्वारा जारी पत्र में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार, जिन अनुक्रमांकों का उल्लेख शिकायत में किया गया है, वे अन्य परीक्षार्थियों को आवंटित किए गए थे।


जांच की प्रक्रिया

शिकायतकर्ता ने शोभिक गोयल की मार्कशीट को फर्जी बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान, माध्यमिक शिक्षा परिषद के मेरठ कार्यालय ने एक पत्र जारी किया, जिसमें गोयल के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों के बारे में चौंकाने वाली जानकारी दी गई। पत्र में कहा गया है कि शोभिक गोयल पुत्र अशोक कुमार गोयल के नाम से जुड़े वर्ष 2004 के हाईस्कूल और वर्ष 2006 के इंटरमीडिएट के अनुक्रमांकों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।


अनुक्रमांक का विवरण

आगरा के शोभिक गोयल का बड़ा फर्जीवाड़ा: हाईस्कूल और इंटर की मार्कशीट निकली फर्जी
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पत्र में बताया गया है कि हाईस्कूल परीक्षा वर्ष 2004 का अनुक्रमांक 0024241 रुचि कुशवाहा को आवंटित किया गया था, जिन्होंने एसबीओआर हाईस्कूल, खेडिया मोड़, आगरा से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा वर्ष 2006 का अनुक्रमांक 069569 राशदा बानो को आवंटित किया गया था, जिन्होंने एमएल कन्या इंटर कॉलेज, बेवर, मैनपुरी से परीक्षा पास की थी।


बड़े सवाल उठते हैं

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शोभिक गोयल न तो इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे और न ही उनके नाम पर कोई अंकपत्र या प्रमाणपत्र जारी किया गया था। शिकायतकर्ताओं मोहित उपाध्याय और अर्पित शर्मा ने आरोप लगाया था कि इन अनुक्रमांकों के आधार पर कूटरचित शैक्षिक प्रमाणपत्र तैयार कर उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। जांच के दौरान परिषद ने अपने अभिलेखों का मिलान किया और दोनों अनुक्रमांकों पर अलग-अलग परीक्षार्थियों के नाम होने की जानकारी दी।


फर्जीवाड़े के पीछे का रहस्य

अब इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर दूसरे परीक्षार्थियों के अनुक्रमांक पर शोभिक गोयल के नाम से प्रमाणपत्र कैसे बने? इन दस्तावेजों का उपयोग कहां किया गया? और इस कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल है?