आम आदमी पार्टी में जातीय समीकरणों की अनदेखी, केजरीवाल का नया संगठन
राजनीति में जातीय समीकरणों का महत्व
भारत की राजनीति में जाति के आधार पर समीकरणों का विशेष महत्व होता है। जब भी किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारियों की घोषणा होती है, तो यह देखा जाता है कि उसमें जातीय संतुलन को कितना ध्यान में रखा गया है। मंत्रियों के चयन में भी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की आवश्यकता होती है। हर जाति को उसकी राजनीतिक ताकत और समर्थन के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाता है। हालांकि, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल इस परंपरा को नजरअंदाज करते हुए दिखाई देते हैं। उनके लिए नेताओं की निष्ठा अधिक महत्वपूर्ण है। हाल ही में जब उन्होंने पार्टी की नई कार्यकारिणी का गठन किया, तो उसमें अपने जातीय और पारिवारिक संबंधों के लोगों को ही प्रमुख पदों पर रखा।
आम आदमी पार्टी की नई कार्यकारिणी
हाल ही में आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अरविंद केजरीवाल को फिर से राष्ट्रीय संयोजक चुना गया। इस संदर्भ में यह कहा जा रहा है कि वे परिवारवादी पार्टियों से अलग नहीं हैं। माना जा रहा है कि जब तक उनके परिवार का कोई सदस्य संयोजक की जिम्मेदारी नहीं लेता, तब तक केजरीवाल ही इस पद पर बने रहेंगे। पिछले 14 वर्षों से वे इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। उन्होंने अपने स्वजातीय पंकज गुप्ता को पार्टी में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद सौंपा है। पंकज गुप्ता को फिर से पार्टी का सचिव नियुक्त किया गया है, जो रोजमर्रा के कार्यों की देखरेख करते हैं। तीसरी महत्वपूर्ण नियुक्ति एनडी गुप्ता की हुई है, जिन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इस प्रकार, तीनों शीर्ष पदों पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। वैश्य समाज के ये तीन नेता आम आदमी पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाते रहेंगे। यह भी माना जा रहा है कि केजरीवाल को विश्वास है कि किसी समय वैश्य समाज भाजपा को छोड़कर उनके साथ जुड़ जाएगा, जिससे वे देश के नेता बन सकेंगे।
