Newzfatafatlogo

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का विवादास्पद बयान: क्या हिन्दू और मुस्लिम एक ही लक्ष्य की ओर हैं?

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में एक विवादास्पद बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि कोई हिन्दू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं रहना चाहिए, तो वह असली हिन्दू नहीं है। उनके इस बयान ने हिन्दू-मुस्लिम संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है। भागवत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि हिन्दू और इस्लाम का लक्ष्य एक समान है, तो फिर द्वेष क्यों? इस लेख में उनके विचारों और इसके पीछे की राजनीति पर चर्चा की गई है।
 | 

संघ प्रमुख का बयान


संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा, "यदि कोई हिन्दू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं रहना चाहिए, तो वह असली हिन्दू नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दू होने का मतलब है कि सभी धर्मों के रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।


इस बयान पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि यदि यह सच है, तो उनके अनुयायी ने 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा क्यों दिया? क्या भाजपा और कांग्रेस का लक्ष्य और रास्ता एक नहीं है?


भागवत ने यह भी कहा कि जब हिन्दू और इस्लाम का लक्ष्य एक समान है, तो आरएसएस और कांग्रेस को एक ही हिन्दू समाज का हिस्सा मानना चाहिए। फिर भी, उनके विचार में द्वेष क्यों है?


उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मुसलमानों का ठेका लिया गया है, जो हिन्दुओं पर हमले करते हैं? क्या यह उचित है कि मुसलमानों को अतिरिक्त बल दिया जाए?


संघ प्रमुख ने यह आरोप लगाया कि हिन्दू सोचते हैं कि मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए, जो कि हिन्दुओं की छवि को धूमिल करता है।


उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम नेता अक्सर धमकी देते हैं और दंगे करते हैं, और यह एक राजनीतिक औजार बन गया है।


भागवत ने कहा कि हिन्दू हमेशा इस्लाम से पीड़ित रहे हैं, और यह आरोप कि हिन्दू उत्पीड़क हैं, गलत है।


उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत में न्याय होता, तो संघ के नेता को कठघरे में खड़ा किया जाता।


आज भी हिन्दू कई क्षेत्रों में असुरक्षित हैं, और यह जिहाद का एक हिस्सा है।


संघ के नेता को यह सब पता है, लेकिन क्या उन्होंने कभी कश्मीर में रैली की है? जबकि मुसलमान भारत के किसी भी शहर में रैली कर सकते हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम का लक्ष्य हमेशा गैर-मुस्लिमों को इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करना रहा है।


क्या हिन्दू धर्म का भी वही लक्ष्य है, जो संघ नेता ने कहा?


भागवत ने यह भी कहा कि मुस्लिम राजनीति हमेशा आरोप लगाने, शिकायत करने और दंगे करने पर निर्भर रही है।


हिन्दू राजनीति में आत्म-निन्दा और आत्म-समर्पण की प्रवृत्ति है।


इस प्रकार, हिन्दू समाज नेतृत्वविहीन है, और उनके नेता अपने स्वार्थ में लिप्त हैं।


जब वोट लेने की बात आती है, तो संघ परिवार हिन्दुओं पर एकाधिकार जताता है।


यह वर्तमान युग की हिन्दू राजनीति है, जिसमें सज्जन पर चढ़ना और दुर्जन से बचना शामिल है।