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आरवीएस मणि के बयान से 26/11 हमले पर नई राजनीतिक बहस शुरू

गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि के बयान ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले पर नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। उन्होंने कांग्रेस और आईएसआई के बीच संभावित संबंधों का आरोप लगाया है। भाजपा ने कांग्रेस से जवाब मांगा है, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक विवादों को चर्चा में ला रहा है।
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नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल


नई दिल्ली: गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि के हालिया बयान ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। एक साक्षात्कार में, उन्होंने कांग्रेस, आईएसआई और हिंदू आतंकवाद के सिद्धांत पर कई गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने इन बयानों के बाद कांग्रेस से जवाब मांगा है, लेकिन कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


आरवीएस मणि के दावे

आरवीएस मणि ने कहा कि यदि 26/11 के हमले के दौरान आतंकी अजमल कसाब को जिंदा नहीं पकड़ा जाता, तो पूरे मामले का रुख हिंदू आतंकवाद की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच एक प्रकार का 'फिक्स मैच' था। यह उनका व्यक्तिगत दावा है।


दिग्विजय सिंह और इशरत जहां का संदर्भ

पूर्व अधिकारी ने यह भी कहा कि 2006 में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उनसे हिंदू आतंकवाद से संबंधित मामलों की जानकारी मांगी थी, जबकि उस समय मंत्रालय के रिकॉर्ड में ऐसा कोई मामला नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि 2010 तक गृह मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों में इस शब्द का उल्लेख नहीं था। मणि ने इशरत जहां मुठभेड़ मामले का भी जिक्र किया।


भाजपा का कांग्रेस पर हमला

आरवीएस मणि के बयानों के बाद भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि यदि शहीद तुकाराम ओंबले ने कसाब को जिंदा नहीं पकड़ा होता, तो फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर कथित हिंदू आतंकवाद की कहानी बनाई जा सकती थी। उन्होंने कांग्रेस से इन आरोपों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की।


राजनीतिक बहस का उभार

यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और 26/11 हमले से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों को चर्चा में ला रहा है। भाजपा इन आरोपों को गंभीर मानते हुए जवाब चाहती है, जबकि कांग्रेस की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। ऐसे में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना बनी हुई है।