इजराइल की कूटनीतिक चुनौतियाँ: नेतन्याहू की ईरान नीति पर सवाल
बेंजामिन नेतन्याहू की ईरान नीति इजराइल के लिए एक गंभीर संकट बन गई है। अमेरिका और खाड़ी देशों से दूरी बनाते हुए, इजराइल की स्थिति कमजोर हो रही है। ट्रंप की चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव ने इजराइल को एक अलग-थलग देश बना दिया है। जानें इस जटिल राजनीतिक परिदृश्य के पीछे के कारण और नेतन्याहू की जिद का क्या असर हो रहा है।
| Jun 10, 2026, 13:02 IST
नेतन्याहू की ईरान नीति का संकट
ईरान को पूरी तरह से समाप्त करने या वहां सत्ता परिवर्तन करने की बेंजामिन नेतन्याहू की जिद अब इजराइल की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रतिष्ठा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका तक, हर कोई इजराइल के आक्रामक रुख से परेशान होकर दूरी बना रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व की राजनीति में इजराइल इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। इस कूटनीतिक संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू से फोन पर तीखी बहस के दौरान कहा कि आप मेरी वजह से अब तक जेल में नहीं गए। आप मेरी शांति योजना में हस्तक्षेप कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को स्पष्ट चेतावनी दी कि संभल जाओ, नहीं तो तुम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेले पड़ जाओगे।
ट्रंप की चेतावनी और इजराइल की स्थिति
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता होने वाला है, और वे इजराइल की जिद के कारण इसे विफल नहीं होने देंगे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वैश्विक नीतियों का निर्धारण अमेरिका करता है, इजराइल नहीं। नेतन्याहू की ईरान नीति का सबसे बड़ा नुकसान इजराइल को खाड़ी देशों के साथ हुआ है। 2020 में अब्राहम अकॉर्ड के तहत यूएई और बहरीन ने इजराइल के साथ दोस्ती की थी, लेकिन अब वह टूटने के कगार पर है। बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय युद्ध के खतरे के चलते यूएई और बहरीन ने इजराइल के सैन्य आक्रामकता से खुद को दूर कर लिया है। हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि पीएम नेतन्याहू ने यूएई का गुप्त दौरा किया, लेकिन यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस दावे का खंडन किया। यूएई ने स्पष्ट किया कि वह इजराइल के साथ किसी भी गुप्त सैन्य या सुरक्षा समझौते का हिस्सा नहीं है। जानकारों के अनुसार, ईरान की सैन्य धमकियों और मुस्लिम जगत में अपनी छवि को लेकर खाड़ी देश अब इजराइल से दूरी बना रहे हैं। दूसरी ओर, बहरीन भी गाजा और लेबनान में इजराइली सैन्य गतिविधियों के कारण असहज महसूस कर रहा है और उसने भी आपत्तियां दर्ज करवाई हैं।
नेतन्याहू की राजनीतिक दांवबाजी
2023 में गाजा में सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद से बहरीन ने अपने राजनयिक को इजराइल से वापस बुला लिया था। नेतन्याहू का राजनीतिक करियर इस बात पर निर्भर था कि वे इजराइल को सुरक्षित रखेंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करेंगे। लेकिन उनकी जिद अब उनके लिए भारी पड़ रही है। ट्रंप जहां युद्ध को समाप्त कर वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर करना चाहते हैं, वहीं नेतन्याहू अपने ऊपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों और घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण युद्ध को खींचना चाहते हैं। गाजा, लेबनान और ईरान के साथ लड़ाई में इजराइली सेना और अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इजराइल के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि नेतन्याहू की जिद ने देश को दुनिया की नजरों में एक परिया स्टेट बना दिया है। ट्रंप के दबाव के बाद, इजराइल और ईरान दोनों ने अपने हमलों को रोकने के संकेत दिए हैं। इस घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि आधुनिक युग में युद्ध केवल सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि कूटनीति से जीते जाते हैं। अमेरिका की महाशक्ति के पीछे हटने और अरब देशों की बेरुखी के बाद, इजराइल को अब यह समझ आ गया है कि ईरान को समाप्त करने की उसकी जिद उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।
