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इजराइल चुनाव: नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को मिली बढ़त, अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण

इजराइल के हालिया चुनाव परिणामों ने राजनीतिक परिदृश्य को नया मोड़ दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक सीटें नहीं मिल पाई हैं। विपक्ष भी अपने दम पर बहुमत से दूर है। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो गई है, जो अगली सरकार के गठन में निर्णायक साबित हो सकती हैं। जानें इस राजनीतिक गतिरोध के पीछे की कहानी और नेतन्याहू के विकल्प क्या हैं।
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इजराइल के चुनाव परिणामों का राजनीतिक परिदृश्य

इजराइल के हालिया चुनाव परिणामों ने राजनीतिक स्थिति को एक नई दिशा में मोड़ दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उनके गठबंधन को बहुमत के लिए आवश्यक 61 सीटें हासिल नहीं हुई हैं। विपक्ष भी अपने दम पर बहुमत से कुछ दूर है। इस स्थिति में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है, जिनके पास कुल 19 सीटें हैं। इनका समर्थन यह तय कर सकता है कि अगली सरकार किसकी बनेगी।


इजराइल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव हुए, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। 29 अक्टूबर की सुबह तक की मतगणना के अनुसार, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें लिकुड को 26, यूनाइटेड टोरा जुडि को 7, शास को 7 और ओत्समा को 7 सीटें मिल रही हैं। वहीं, विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिल रही हैं।


अरब पार्टियों की संभावित भूमिका

अरब पार्टियों की बढ़त बातचीत में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, हालांकि विपक्ष के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की उनकी इच्छा अभी स्पष्ट नहीं है। जॉइंट लिस्ट के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने कहा कि मतदाताओं ने नेतृत्व में बदलाव की इच्छा जताई है। उन्होंने नेतन्याहू के विरोधियों को चुनौती दी कि वे उनके गठबंधन के साथ बातचीत करें। जबरीन ने कहा कि वे नेतन्याहू को हटाने के लिए विपक्ष के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन मौजूदा हालात में किसी सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने की संभावना को खारिज किया।


नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के प्रभाव को बढ़ने की चेतावनी दी थी और उनकी लिकुड पार्टी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।


विपक्ष में अरब सांसदों के साथ सहयोग को लेकर भ्रम

हालांकि अरब पार्टियों की भूमिका सरकार बनाने में निर्णायक हो सकती है, लेकिन विपक्ष के कुछ धड़े उनके साथ काम करने से हिचकिचा रहे हैं। इजराइल की मुख्य वामपंथी पार्टी के नेता यायर गोलान ने अरब सांसदों के साथ सहयोग की वकालत की है। उन्होंने कहा कि हमें यहूदी और अरब वोटों के बीच विभाजन को स्वीकार नहीं करना चाहिए।


हालांकि, राजनीतिक वैज्ञानिक गिदोन राहत ने कहा कि अरब पार्टियों की जीत के बावजूद, अधिकांश राजनीतिक खेमों के पास सत्ता तक पहुँचने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं है।


नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे

स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण लंबी बातचीत चल सकती है, और यदि पार्टियां सरकार बनाने के किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाती हैं, तो दोबारा चुनाव भी हो सकते हैं। जब तक नई सरकार का गठन नहीं होता, नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। यह राजनीतिक गतिरोध ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ तनाव बढ़ गया है।