इजराइल चुनाव में विदेशी दखल की आशंका, नेतन्याहू की पार्टी ने उठाए सवाल
इजराइल में चुनावी विवाद
तेल अवीव में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताई गई है। चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच के लिए 'शिन बेट' को आदेश दिए हैं। 'द टाइम्स ऑफ इजराइल' की रिपोर्ट के अनुसार, यह एजेंसी एक सप्ताह में अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को संदेह है कि कतर और तुर्की से इजराइल और वेस्ट बैंक में धन भेजा गया है, जिसका उपयोग अरब नागरिकों को वित्तीय सहायता देने के लिए किया गया।
विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यह कहते हुए कि कतर का चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप एक गंभीर मामला है। आइजनकोट ने कतरगेट मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की। आरोप है कि नेतन्याहू के पूर्व सलाहकारों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए कतर के लिए जनसंपर्क का कार्य किया।
इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच की मांग की है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इन आरोपों के आधार पर पूरे अरब समुदाय को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, कतर ने इजराइल के चुनाव में हस्तक्षेप और अरब वोट बढ़ाने के लिए धन देने के आरोपों को खारिज किया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने इन आरोपों को निराधार और खतरनाक बताया, यह कहते हुए कि इजराइली नेता अपनी राजनीतिक विफलताओं का दोष कतर पर डाल रहे हैं।
चुनाव के अगले दिन, यानी गुरुवार को, सभी बैलट वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। अब केवल डाक मतपत्रों की गिनती बाकी है। उल्लेखनीय है कि 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के परिणामों में, प्रधानमंत्री नेतन्याहू और विपक्षी नेता आइजनकोट दोनों बहुमत से दूर हैं। वर्तमान में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें और विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलने की संभावना है।
