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इजरायल में आम चुनाव की तारीख तय, नेतन्याहू की किस्मत का फैसला 27 अक्टूबर को

इजरायल में आम चुनाव की तारीख 27 अक्टूबर तय की गई है, जब वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा। यह चुनाव इजरायली कानून के अनुसार अंतिम तिथि पर होंगे और 1988 के बाद पहली बार समय पर आयोजित किए जाएंगे। नेतन्याहू की सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, और हाल के पोल के अनुसार, वे बहुमत से पीछे रह सकते हैं। जानें इस चुनाव के महत्व और संभावित परिणामों के बारे में।
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इजरायल में चुनाव की घोषणा

तेल अवीव: इजरायल में आम चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। नेसेट के कानूनी सलाहकार सागिट अफिक ने रविवार को बताया कि नेसेट 17 जुलाई को भंग होगा। इसके बाद चुनाव 27 अक्टूबर को होंगे, जो कि इजरायली कानून के अनुसार अंतिम तारीख है। इस दिन वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा।


चुनाव की प्रक्रिया और महत्व

इजरायली मीडिया टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, अफिक ने नेसेट हाउस कमेटी की बैठक में कहा, "मौजूदा नेसेट अपना कार्यकाल पूरा करेगी और इसे जल्दी भंग नहीं किया जाएगा। चुनाव की तारीख कानून के अनुसार निर्धारित की गई है और यह 27 अक्टूबर ही रहेगी।" यह पहली बार होगा जब 1988 के बाद इजरायल में समय पर आम चुनाव होंगे। यदि ऐसा होता है, तो नेतन्याहू की सरकार 1973 के बाद पहली ऐसी सरकार बन जाएगी जिसने अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा किया हो।


वर्तमान सरकार की स्थिति

यह घोषणा उस समय की गई है जब गठबंधन ने संसद भंग होने से पहले विवादित बिल पास कराने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं। आमतौर पर, संसद भंग होने पर कानून तब तक नहीं बनते जब तक गठबंधन और विपक्ष दोनों सहमत न हों। इजरायल की 37वीं सरकार 29 दिसंबर, 2022 को नफ्ताली बेनेट-यायर लैपिड सरकार के गिरने के बाद बनी थी।


नेतन्याहू की सरकार की चुनौतियाँ

नेतन्याहू के नेतृत्व वाली मौजूदा गठबंधन सरकार, जिसमें लिकुड और कई अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स तथा दक्षिणपंथी दल शामिल हैं, को इजरायल के इतिहास की सबसे कट्टरपंथी सरकारों में से एक माना जाता है। हाल के समय में, नेतन्याहू की सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कई मौकों पर कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों ने सरकार गिराने की धमकी दी है, लेकिन अब तक सरकार एकजुट बनी हुई है।


चुनाव के संभावित परिणाम

इजरायली मीडिया के अनुसार, यदि आज चुनाव होते हैं, तो नेतन्याहू और उनके सहयोगी 120 सीटों वाली नेसेट में बहुमत से काफी पीछे रह जाएंगे। वहीं, विपक्षी गुट भी बहुमत के करीब नहीं पहुंच पा रहा है। नेतन्याहू के खिलाफ गठबंधन में अरब-बहुमत वाली और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां शामिल नहीं हैं।