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इजरायल में नई सरकार गठन की चुनौतियाँ: गादी आइजनकोट का सामना

इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट को नई सरकार बनाने का न्योता मिला है, लेकिन उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे आइजनकोट के लिए अल्पमत सरकार बनाना मुश्किल हो सकता है। अरब दलों का समर्थन, रूढ़िवादी यहूदी दलों के साथ गठबंधन, और राष्ट्रीय एकता सरकार की संभावनाएँ चर्चा का विषय हैं। यदि आइजनकोट सफल नहीं होते, तो नेतन्याहू को फिर से सरकार बनाने का मौका मिल सकता है।
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गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति का न्योता

इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने नई सरकार बनाने का आमंत्रण दिया है। 27 अक्टूबर को हुए चुनावों में किसी भी पार्टी या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। आइजनकोट के सामने कई चुनौतियाँ हैं, क्योंकि उनके गठबंधन के पास आवश्यक सीटें नहीं हैं।


अल्पमत सरकार बनाने की संभावनाएँ

इजरायल की 120 सीटों वाली संसद 'नेसेट' में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में, आइजनकोट की यशार पार्टी और उनके सहयोगियों के पास कुल 48 सीटें हैं। वहीं, दो अरब दलों के पास 19 सीटें हैं, जिन्होंने नेतन्याहू को सत्ता में आने से रोकने के लिए आइजनकोट को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। यदि ये दल समर्थन देते हैं, तो गठबंधन का आंकड़ा 67 तक पहुँच सकता है।


रूढ़िवादी यहूदी दलों का समर्थन

आइजनकोट के पास एक और विकल्प है, जिसमें दो अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी दलों की 13 सीटें शामिल हैं। यदि ये दल उनके साथ आते हैं, तो आइजनकोट आसानी से 61 सीटों का आंकड़ा पार कर सकते हैं। हालांकि, इस रास्ते में सबसे बड़ी बाधा यह है कि रूढ़िवादी यहूदी छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने का मुद्दा है, जिसका विरोध देश के एक बड़े हिस्से द्वारा किया जा रहा है।


नेतन्याहू का संभावित कदम

आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए अधिकतम 42 दिनों का समय दिया गया है। यदि वह इस अवधि में आवश्यक संख्या जुटाने में असफल रहते हैं, तो राष्ट्रपति हर्जोग नेतन्याहू को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं। नेतन्याहू के गठबंधन की सीटें 64 से घटकर 53 रह गई हैं, फिर भी वह विरोधी खेमे में सेंधमारी कर सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।


राष्ट्रीय एकता सरकार की संभावना

यदि अरब या रूढ़िवादी दल सहयोग नहीं करते हैं, तो एक राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन भी संभव है। इसमें यशार, टुगेदर, इजरायल अवर होम और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इसके लिए आइजनकोट को नेतन्याहू को हटाने का अपना मुख्य चुनावी एजेंडा छोड़ना होगा।


क्या फिर से चुनाव होंगे?

यदि आइजनकोट और नेतन्याहू दोनों ही सरकार नहीं बना पाते, तो संसद किसी तीसरे चेहरे को मौका दे सकती है, जिसके लिए लगभग 100 दिनों की मोहलत मिलेगी। यदि तब भी कोई समाधान नहीं निकलता, तो देश में फिर से आम चुनाव कराए जा सकते हैं। राष्ट्रपति हर्जोग ने सभी दलों से अपील की है कि वे खुले मन से बातचीत करें ताकि देश को बार-बार चुनावों से बचाया जा सके।