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इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने योगी मॉडल से प्रेरित होकर सख्त सुरक्षा प्रावधानों की घोषणा की

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल से प्रेरित होकर हिंसक प्रदर्शनों के खिलाफ सख्त सुरक्षा प्रावधानों की घोषणा की है। नए नियमों के तहत, तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, किशोरों को हिरासत में लेने का अधिकार भी पुलिस को दिया गया है। इस लेख में इटली और फ्रांस में बढ़ती अशांति और सरकारों की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है।
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इटली में हिंसा के खिलाफ सख्त कदम

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करीबी मित्र हैं, ने उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल से प्रेरणा लेते हुए हिंसक प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। योगी सरकार की तरह, मेलोनी सरकार भी दंगाइयों से सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई कराने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है। इटली में अब तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को जेल, भारी जुर्माना और नुकसान की भरपाई का सामना करना पड़ सकता है।


सुरक्षा प्रावधानों में बदलाव

हाल ही में इटली में हुई हिंसा के बाद, मेलोनी सरकार ने सुरक्षा से संबंधित कड़े प्रावधानों को मंजूरी दी है। उत्तरी इटली के शहरों में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों के शीशे तोड़कर लूटपाट की और पुलिस पर हमले किए। इसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नए नियमों के तहत, सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में शामिल होने पर पांच साल तक की जेल और 20,000 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।


किशोरों की हिरासत का प्रावधान

मेलोनी सरकार ने 14 से 17 वर्ष के किशोरों को हिरासत में लेने का अधिकार पुलिस को दिया है, यदि उनके खतरनाक होने के संकेत मिलते हैं। यह प्रावधान पहले केवल वयस्कों के लिए था। इसके अलावा, मिलान में महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा के लिए 2026 के अंत तक 500 सैनिकों की तैनाती की जाएगी। मेलोनी का स्पष्ट संदेश है कि तोड़फोड़ और चोरी को क्रांति नहीं, बल्कि अपराध माना जाएगा।


योगी मॉडल की प्रभावशीलता

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी सरकार की नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान और उनसे नुकसान की भरपाई कराने का प्रयास किया गया है। इस सख्त नीति ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


इटली में आर्थिक चुनौतियाँ

इटली में हालात केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। दक्षिणी हिस्सों में डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के कारण ट्रक चालकों ने सड़कें जाम कर दी हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। सरकार ने ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद अतिरिक्त सहायता देने का आश्वासन दिया है।


यूरोप में बढ़ती अशांति

फ्रांस में भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। सितंबर में सार्वजनिक शिक्षा में सुधार के लिए शुरू हुए प्रदर्शन अब महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी नाराजगी तक फैल गए हैं। कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं, जिससे दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचा है।


सरकारों की प्राथमिक परीक्षा

इटली और फ्रांस की घटनाएं यूरोप के सामने एक बड़ी चुनौती को उजागर करती हैं। जब भीड़ हिंसा और लूटपाट पर उतर आती है, तब सरकारों की प्राथमिक परीक्षा होती है कि वे सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को कैसे सुनिश्चित करती हैं।