इमरान मसूद का विवादास्पद बयान: ताहिर हुसैन की सजा पर नाम का असर
ताहिर हुसैन के मामले में इमरान मसूद का बयान
नई दिल्ली। 2020 में हुए दिल्ली दंगों के मामले में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि ताहिर का नाम कपिल होता, तो शायद वह इस मामले में बरी हो जाता, लेकिन उसके नाम के कारण उसे दोषी ठहराया गया।
इमरान मसूद का क्या कहना है?
मीडिया से बातचीत में इमरान मसूद ने अदालत के फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन उनका मानना है कि ताहिर हुसैन के साथ भेदभाव हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर ताहिर का नाम कपिल होता, तो वह बच जाता, लेकिन उसके नाम के कारण वह फंस गया।
कोर्ट ने किन आरोपों में ताहिर को दोषी ठहराया?
दिल्ली की एक अदालत ने ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी पाया है। अदालत ने ताहिर को दंगा भड़काने, नफरत फैलाने, हिंसा, आपराधिक बल प्रयोग और हत्या जैसे गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया। यह सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत में हुई।
मामले का संक्षिप्त विवरण
25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांदबाग क्षेत्र में एक नाले से बरामद हुआ। अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में तत्कालीन आप पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य पर हत्या का आरोप लगाया गया था।
दंगों में हुई थी 53 लोगों की मौत
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस हिंसा से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में अंकित शर्मा की हत्या का मामला भी शामिल है।
