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ईरान और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी

ईरान ने भारत के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को 'सभ्यतागत साझेदारी' के रूप में परिभाषित किया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की आगामी यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के दौरान, ईरान भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की योजना बना रहा है। इस यात्रा के दौरान चाबहार पोर्ट और व्यापारिक सहयोग पर चर्चा की जाएगी। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के पीछे की रणनीतियाँ और संभावनाएँ।
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ईरान का भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने का इरादा

ईरान ने भारत के साथ अपने प्राचीन संबंधों को 'सभ्यतागत साझेदारी' के रूप में परिभाषित किया है। तेहरान से आए इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की आगामी यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार, रणनीतिक सहयोग और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना है। पेज़ेशकियन 12 और 13 सितंबर को भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह बयान किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उनकी उच्चस्तरीय वार्ता के बाद आया है।


भारत के साथ संबंधों पर जोर

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पेज़ेशकियन की हालिया राजनयिक मुलाकातों के संदर्भ में भारत के साथ संबंधों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है, विशेषकर व्यापार और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में। ईरानी दूतावास ने भी इस रिश्ते के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के साथ उनका रिश्ता ऐतिहासिक और सभ्यतागत है।


ब्रिक्स समिट का महत्व

बघाई ने कहा कि तेहरान ब्रिक्स मंच का उपयोग भारत के साथ बातचीत जारी रखने और सहयोग के नए अवसरों की खोज के लिए करना चाहता है। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से ब्रिक्स समिट के दौरान आपसी हित के क्षेत्रों में बातचीत जारी रखेंगे।"


व्यापार और आर्थिक सहयोग पर ध्यान

ईरान ने व्यापार और आर्थिक जुड़ाव को उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में बताया है जहाँ दोनों देश अपनी साझेदारी को बढ़ा सकते हैं। बघाई ने कहा कि भारत SCO और BRICS दोनों का सदस्य है, जो इसे बड़े बहुपक्षीय मंचों में महत्वपूर्ण बनाता है।


चाबहार पोर्ट की भूमिका

भारत-ईरान बातचीत में चाबहार पोर्ट एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा। बघाई ने कहा, "ईरान और भारत के बीच बातचीत में कई मुद्दों पर चर्चा होती है, जिसमें चाबहार पोर्ट भी शामिल है।"


मोदी-पेज़ेशकियन की बैठक का महत्व

यह बयान पिछले हफ्ते बिश्केक में मोदी और पेज़ेशकियन के बीच हुई बैठक के बाद आया है, जो दो वर्षों में दोनों नेताओं के बीच पहली बातचीत थी। मोदी ने ब्रिक्स और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से ईरान के साथ सहयोग की भारत की तत्परता व्यक्त की।


पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा

दोनों नेताओं के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में संघर्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बैठक को फलदायी बताया और कहा कि नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों की समीक्षा की।


उच्च-स्तरीय बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल

मोदी और पेज़ेशकियन की बैठक के दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।


ब्रिक्स बैठक का महत्व

पेज़ेशकियन की आगामी यात्रा दोनों देशों के बीच बिश्केक में हुई बातचीत को आगे बढ़ाने का एक और अवसर प्रदान करती है। ब्रिक्स एक व्यापक बहुपक्षीय मंच है, जो व्यापार, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी पर जोर देता है।