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ईरान की कट्टरपंथी प्रतिक्रिया: अमेरिकी चुनावों में ट्रंप की हार के बाद बढ़ा दबाव

ईरान के नेताओं ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ट्रंप की हार के बाद वॉशिंगटन पर दबाव बढ़ा दिया है। तेहरान का कहना है कि यह हार अमेरिका की युद्ध नीति की असफलता को दर्शाती है। कट्टरपंथी नेता अब इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ट्रंप और उनके सहयोगी इस हार का ठीकरा युद्ध पर डाल रहे हैं। ईरान ने बातचीत के लिए सात शर्तें रखी हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इन पर सहमत होगा या नहीं।
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ईरान का अमेरिका पर बढ़ता दबाव

ईरान के नेताओं और कट्टरपंथी समूहों ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद वॉशिंगटन पर दबाव बढ़ा दिया है। तेहरान का कहना है कि यह राजनीतिक झटका दर्शाता है कि अमेरिका पिछले आठ महीनों से चल रहे युद्ध में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है।


कट्टरपंथियों का तीखा हमला

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रजाई ने ट्रंप प्रशासन का मजाक उड़ाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "आप युद्ध भी हार गए और चुनाव भी। वेंस ने हार मान ली है, रुबियो बाहर होने वाले हैं, हेगसेथ को हटाया जाने वाला है और सेंटकॉम कमांडर अब पॉडकास्टर बन गए हैं! तो फिर, वॉशिंगटन में हमें असल में अपना संदेश किसे देना चाहिए?" तेहरान का मानना है कि ट्रंप अब अपने ही देश में घिर चुके हैं और युद्ध रोकने के लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी होगी।


कट्टरपंथियों की नई रणनीति

रिपब्लिकन पार्टी की हार ने ईरानी कट्टरपंथियों को एक नया अवसर प्रदान किया है। उनका दावा है कि इस युद्ध में ईरान पहले ही जीत चुका है। ईरान के रूढ़िवादी नेता और मीडिया संस्थान सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह वॉशिंगटन के सामने झुकने से बचें और ऐसा समझौता करें जिससे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सके।


ट्रंप और वेंस की हार का ठीकरा युद्ध पर

यह आक्रामकता तब सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप और उनके उपाध्यक्ष जे.डी. वेंस ने मध्यावधि चुनावों में हार का कारण इस युद्ध को बताया। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि पार्टी की हार में इस युद्ध की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वहीं, वेंस ने 'एक्स' पर स्पष्ट रूप से लिखा, "हमारी हार का सबसे बड़ा कारण यह युद्ध है।"


बातचीत जारी, लेकिन स्थिति जटिल

आठ महीने बीत जाने के बाद भी यह संघर्ष किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। सैन्य मोर्चे पर जंग सुस्त पड़ चुकी है और राजनयिक प्रयासों में भी कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं मिला है। ईरानी वार्ताकार कतर की मध्यस्थता में लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और सीजफायर पर बातचीत हो सके।


खाड़ी देशों में कूटनीतिक हलचल

चुनावी नतीजों के बाद खाड़ी देशों में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। कतर के अनुसार, ट्रंप ने अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से तनाव कम करने पर चर्चा की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान और तुर्की के विदेश मंत्रियों से संपर्क किया है।


ईरान की शर्तें

तेहरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलने के लिए सात सख्त शर्तें रखी हैं। इनमें सभी मोर्चों पर तुरंत युद्ध रोकना, युद्ध के नुकसान का हर्जाना देना, अमेरिकी फौजों की पूरी वापसी और सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वॉशिंगटन इनमें से किसी भी शर्त को मानने के लिए तैयार है या नहीं।