ईरान की कूटनीति: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की कोशिशें विफल
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
स्टेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर महाशक्तियों की कूटनीति पूरी तरह से असफल हो चुकी है, और अमेरिका के हर प्रस्ताव को तेहरान ने सीधे तौर पर ठुकरा दिया है। यह क्षेत्र, जो विश्व में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का 20% नियंत्रित करता है, अब किसी भी बातचीत के लिए तैयार नहीं दिख रहा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसीन रिजाई ने व्हाइट हाउस को स्पष्ट रूप से बताया कि वाशिंगटन की अधूरी शर्तें तेहरान के लिए स्वीकार्य नहीं हैं। ईरान ने अमेरिका के सामने सात स्पष्ट शर्तें रखी थीं। क़तर के माध्यम से कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, और अमेरिका ने क़तर के जरिए जवाब भी भेजा, लेकिन रिजाई के अनुसार, अमेरिका ने कुछ शर्तें मान लीं, जबकि मुख्य मुद्दों पर चुप्पी साध ली।
तेहरान का कड़ा संदेश
तेहरान ने क़तर और अमेरिका दोनों को दो स्पष्ट संदेश दिए हैं। जब तक जून के इस्लामाबाद समझौते के आधार पर सभी सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक न तो होर्मुज का रास्ता खुलेगा, न किसी जहाज को गुजरने दिया जाएगा, और न ही अमेरिका के साथ कोई नई बातचीत की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, क़तर के कूटनीतिक गलियारों में असली विवाद इस बात पर है कि पहले कौन कदम उठाएगा। ईरानी संसद के स्पीकर मुहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि वह अपनी एकतरफा मांगों के जरिए बातचीत को लंबा नहीं खींच सकता।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
फरवरी के अंत में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करे, लेकिन तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका अपनी पाबंदियां नहीं हटाता और सात शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक होर्मुज को बंद रखा जाएगा। चाहे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम कितने भी बढ़ जाएं, ईरान झुकने के मूड में नहीं है।
