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ईरान की संसद का अमेरिका को चेतावनी: सैन्य कार्रवाई की तैयारी

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ़ ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि वह जून में हुए समझौते के तहत अपने वादों को पूरा नहीं करता, तो ईरान सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका प्रतिबंधों को समाप्त नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाएगा। यह बयान 60 दिनों के राजनयिक तनाव के बीच आया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं अभी भी लागू नहीं हुई हैं।
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ईरान की कड़ी चेतावनी

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ़ ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका जून में हुए 14-पॉइंट समझौते के तहत अपने वादों को पूरा नहीं करता है, तो ईरान सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जब तक वॉशिंगटन मुख्य शर्तों जैसे प्रतिबंधों और नाकेबंदी को समाप्त नहीं करता, तब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखेगा।


घालीबाफ़ ने ईरान की 12वीं संसद के 180वें सत्र में कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान की सेना और कूटनीतिक पक्ष मिलकर अमेरिका द्वारा किए गए समझौते के उल्लंघन का जवाब दें। उन्होंने यह भी कहा कि दुश्मन ने मजबूरी में युद्धविराम स्वीकार किया था, लेकिन अब वह अपने वादों से मुंह मोड़ रहा है।


जलडमरूमध्य का मुद्दा

ईरान के संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिका पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए हस्ताक्षरित समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को नाकाबंदी हटाना, जब्त की गई संपत्तियों को वापस करना, और अन्य वादों को पूरा करना होगा।


संघर्ष और रणनीतिक स्थिति

घालीबाफ़ की टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मुद्दा अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील और अन्य प्रतिबद्धताओं से जुड़ा हुआ है। यह जलमार्ग तेहरान की राजनयिक सौदेबाजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।


उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखता है, तो ईरान और अधिक तनाव बढ़ाने के लिए तैयार है। उनका यह बयान 60 दिनों के राजनयिक तनाव के बीच आया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं अभी भी लागू नहीं हुई हैं।


आर्थिक दबाव की रणनीति

घालीबाफ़ ने अमेरिका की नई रणनीति पर भी ध्यान दिया, जिसका उद्देश्य आर्थिक दबाव और सामाजिक विभाजन के माध्यम से ईरान को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि दुश्मन सैन्य और कूटनीतिक साधनों से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहने के बाद अब आर्थिक दबाव और राष्ट्रीय एकता को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है।