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ईरान के F-5 विमान का साहसिक मिशन: अमेरिकी बेस पर हमला

28 फरवरी से 6 मार्च 2026 के बीच, ईरान का F-5 विमान एक साहसिक मिशन पर निकला, जिसमें उसने कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमला किया। इस हमले ने ईरान की वायुसेना की क्षमता को साबित किया और दुश्मनों को चौंका दिया। जानें इस अद्भुत घटना के पीछे की कहानी और ईरानी पायलटों की बहादुरी।
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ईरान के F-5 विमान का साहसिक मिशन: अमेरिकी बेस पर हमला

युद्ध का पहला हफ्ता

28 फरवरी से 6 मार्च 2026 के बीच, अमेरिका और इजराइल के हमलों के चलते युद्ध का पहला सप्ताह चल रहा था। इस दौरान, ईरानी मिसाइलें ज्वालामुखी की तरह फट रही थीं, जिससे मध्य पूर्व में भारी तबाही मची थी।


ईरान का साहसिक कदम

इस बीच, समुद्र की सतह से केवल 50 फीट की ऊंचाई पर, ईरान एक नई बहादुरी की कहानी लिखने जा रहा था। एक ईरानी लड़ाकू विमान फारस की खाड़ी के निकट उड़ान भर रहा था, जो समुद्र की लहरों के बिल्कुल करीब था। इसे अपने गुप्त मिशन को पूरा करना था, जहां एक छोटी सी गलती का मतलब मौत हो सकता था।


दुश्मन की सोच से परे

इस विमान में दो ईरानी पायलट थे, जो इसे फारस की खाड़ी से कुवैत की ओर ले जा रहे थे। उस दिन कुछ ऐसा होने वाला था, जिसकी कल्पना भी अमेरिका और इजराइल ने नहीं की थी। आमतौर पर, ईरान की वायुसेना को कमजोर माना जाता था, लेकिन इस बार उनकी बहादुरी और सूझबूझ ने सबको चौंका दिया। यह पुराना 'नॉर्थ F-5' लड़ाकू विमान, जिसे ईरान ने 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले अमेरिका से खरीदा था, कुवैत की ओर बढ़ रहा था।


विमान की उड़ान की वजह

अब सवाल यह है कि ईरानी पायलट इस पुराने F-5 विमान को समुद्र के इतने करीब और इतनी कम ऊंचाई पर क्यों उड़ा रहे थे? ईरान की वायुसेना के पायलटों ने एक इंटरव्यू में बताया कि दुश्मन के रडार से बचने के लिए उन्होंने इस विमान को केवल 50 फीट की ऊंचाई पर उड़ाया। आमतौर पर, लड़ाकू विमानों की ऊंचाई कम से कम 500 फीट होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने अपनी तकनीक का उपयोग करते हुए इसे समुद्र के स्तर पर उड़ाया।


हमला और मिशन की सफलता

इस घटना के दूसरे हिस्से में, रडार से बचते हुए ईरान का F-5 विमान कुवैत के अमेरिकी बेस 'अली अल सालेम एयर बेस' के ऊपर पहुंच गया। इससे पहले कि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली कुछ समझ पाती, विमान ने जोरदार हमला कर दिया, जिसमें छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। मिशन पूरा करने के बाद, ईरानी पायलट सुरक्षित निकल गए।