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ईरान ने अमेरिका के आरोपों का किया खंडन, ट्रंप की नीतियों पर उठाए सवाल

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आरोपों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराने के अमेरिकी दावे को खारिज किया और अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए। बकाई ने 1939 के इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कोई नई रणनीति नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरानी मीडिया टीम को वीज़ा न देने की आलोचना की। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी।
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ईरान का कड़ा जवाब

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आरोपों का सख्त जवाब दिया है। ट्रंप ने कहा था कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान जिम्मेदार है। बकाई ने इस अमेरिकी नैरेटिव की तुलना 1939 में पोलैंड पर नाजी जर्मनी के आक्रमण के तरीके से की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में यह सवाल उठाया कि क्या ईरान को ईंधन की कीमतों में वृद्धि के लिए दोषी ठहराना उचित है, जबकि संकट में अमेरिका के कदमों की भी भूमिका है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य और वाणिज्यिक शिपिंग में रुकावटें शामिल हैं।


इतिहास से सीख

बकाई ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी ईरान को दोषी ठहराते हैं, मानो जनता की याददाश्त इतनी कमजोर हो कि वे भूल जाएं कि असली आक्रामक युद्ध किसने शुरू किया। उन्होंने कहा कि यह कोई नई रणनीति नहीं है। बकाई ने 1939 में हिटलर द्वारा पोलैंड पर हमले को बचाव के रूप में पेश करने का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसे 'रणनीतिक समझदारी' माना जाना चाहिए या यह 'मूर्खतापूर्ण कदम' का एक उदाहरण है।


अमेरिका की मीडिया नीतियों पर आलोचना

इससे पहले, बकाई ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरानी राष्ट्रपति की मीडिया टीम के सदस्यों को वीज़ा न देने के निर्णय की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय विदेशी और अमेरिकी पत्रकारों दोनों के लिए जानकारी तक पहुँच को सीमित करता है। बकाई ने कहा कि जब कोई प्रशासन अपने दरवाज़े बंद कर लेता है, तो वह जानकारी पाने के अधिकार को कुचलने की कोशिश कर रहा होता है। यह टिप्पणी तब आई जब दुनिया भर के नेता 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए इकट्ठा हो रहे थे।