ईरान पर अमेरिकी हमले का भारत को क्या लाभ है?
अमेरिकी हमले की पृष्ठभूमि
हाल ही में अमेरिकी मिसाइलों ने आसमान को लाल कर दिया है। महज 20 दिन पहले, 17 जून को, ट्रंप और ईरान ने यह घोषणा की थी कि वे अब युद्ध नहीं करेंगे। लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप ने नाटो की बैठक से लौटते ही ईरान के सात शहरों पर हमला कर दिया। ईरान की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने ट्रंप द्वारा दी गई 7 दिन की मोहलत को अपनी जीत समझ लिया। एक ओर, ईरान में 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लग रहे थे, वहीं दूसरी ओर, उसने स्ट्रेट ऑफ हॉरमूस को बंधक बनाकर 24 घंटे में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल जहाजों पर हमला कर दिया। ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने कसम खा ली कि वह ईरान को तबाह कर देंगे।
अमेरिका का नया हमला
इस बार अमेरिका ने केवल ईरान के सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि उस मार्ग को भी नष्ट कर दिया है, जिसके माध्यम से ईरान दुनिया के प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर रहा था। तेहरान-मशहद रेलवे लाइन, जो बीजिंग से तेहरान तक फैली हुई है, चीन की लाइफलाइन है। इसी मार्ग से शी जिनपिंग ईरान को मिसाइल, ड्रोन और अन्य हथियार सप्लाई कर रहे थे। अमेरिका ने बमबारी करके चीन के इस गुप्त लॉजिस्टिक नेटवर्क को नष्ट कर दिया है। यह अमेरिका का ऐसा हमला है जिसने एक साथ दो लक्ष्यों को साधा है: ईरान को कमजोर करना और चीन को नुकसान पहुंचाना।
भारत के लिए संभावनाएं
यहां असली जियोपॉलिटिकल ट्विस्ट छिपा है। चीन का सिल्क रूट अब समाप्त हो गया है। चीन इस रेल मार्ग के जरिए भारत को घेरकर मध्य पूर्व और सेंट्रल एशिया का प्रमुख बनना चाहता था। अमेरिका ने इस रूट को तोड़कर चीन के अरबों डॉलर के वन बेल्ट वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचाया है। अब भारत वैश्विक व्यापार का केंद्र बन सकता है। ईरान ने भारत के चाबार पोर्ट पर हमला किया, लेकिन चीन का रास्ता बंद होने के बाद, अब मिडिल ईस्ट और यूरोप तक व्यापार करने का एकमात्र सुरक्षित मार्ग भारत का IMEC (इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) होगा। अमेरिका और पश्चिमी देश अब इस रूट को सुरक्षित करने में अपनी पूरी ताकत लगाएंगे।
