उत्तर प्रदेश में तीसरे मोर्चे की संभावनाएं: स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद की मुलाकात
राजनीतिक हलचल का नया दौर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आई है। चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे के गठन की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात की, जिससे इस विषय पर अटकलें और बढ़ गई हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस मुलाकात को औपचारिक बताया है, लेकिन इसके पीछे कई राजनीतिक संकेत छिपे हुए हैं। इसके अलावा, ओवैसी भी पहले ही तीसरे मोर्चे के गठन के संकेत दे चुके हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में लगभग आठ महीने का समय शेष है, और इस मुलाकात ने प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य का प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, क्योंकि उनके समर्थक हर जिले में बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में, वे कई विधानसभाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अपनी जनता पार्टी की स्थापना से पहले, स्वामी प्रसाद मौर्य कई राजनीतिक दलों का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने लोकदल, जनता दल, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले, उन्होंने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा था। हालांकि, चुनाव में हार के बाद उन्होंने 2024 में राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी की स्थापना की, जिसे बाद में अपनी जनता पार्टी (एजेपी) के नाम से जाना गया।
